गुराई ग्राम गुराई में आयोजित वेद यज्ञ महोत्सव वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और समाजोपयोगी विचारों के बीच शुभ संकल्पों के साथ संपन्न हो गया। समापन अवसर पर यज्ञ के ब्रह्मा एवं अंतरराष्ट्रीय वेद कथाकार आचार्य संजीव रूप ने श्रद्धालुओं को जीवन में सदाचार, सत्यनिष्ठा और सकारात्मक बदलाव अपनाने का संकल्प कराया। उन्होंने कहा कि यज्ञ की सार्थकता तभी है, जब हम अपनी बुराइयों की आहुति देकर जीवन में अच्छाइयों का समावेश करें। आचार्य संजीव रूप ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे दक्षिणा के रूप में अपनी किसी बुराई को छोड़ने तथा एक अच्छी आदत अपनाने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि झूठ, ईर्ष्या, द्वेष, नशा, आलस्य और आपसी वैमनस्य जैसी बुराइयों को त्यागकर सत्य, प्रेम, परोपकार, अनुशासन और सद्भाव को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। सच्चा धार्मिक जीवन वही है, जिसमें मनुष्य के आचरण से परिवार, समाज और राष्ट्र का कल्याण हो। उन्होंने कहा कि यज्ञ केवल अग्नि में आहुति देने का नाम नहीं, बल्कि अपने दुर्गुणों को त्यागकर श्रेष्ठ गुणों को जीवन में धारण करने की प्रेरणा भी है। यदि प्रत्येक व्यक्ति स्वयं में सुधार का संकल्प ले, तो परिवार सुखी, समाज संगठित और राष्ट्र शक्तिशाली बन सकता है।
मां दुर्गा के स्वरूप से मिला संगठन और शक्ति का संदेश
महोत्सव के दौरान आचार्य संजीव रूप ने नवरात्र की महिमा का वर्णन करते हुए मां दुर्गा के आठ हाथों को संगठन, सामूहिक शक्ति और सहयोग की प्रेरणा का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्गों को आपसी भेदभाव भुलाकर एकता के सूत्र में बंधना चाहिए। संगठन और परस्पर सहयोग से ही समाज उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ सकता है।
भजनों और उपदेशों से भक्तिमय रहा वातावरण
महोत्सव में मेरठ से पधारे अंतरराष्ट्रीय भजनोपदेशक पंडित संदीप गिल ने मधुर भजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भावविभोर किया। बिजनौर से पधारीं आर्य समाज की भजनोपदेशिका श्रीमती छवि आर्य ने भजनों एवं प्रेरणादायक उपदेशों के माध्यम से गृहस्थ जीवन में प्रेम, सम्मान, सदाचार और पारिवारिक जिम्मेदारियों के महत्त्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में पंडित उदयराज आर्य, ज्ञानदेव आर्य, स्वामी विश्वमुनि जी एवं पंडित मुनेन्द्र आर्य ने भी वैदिक संस्कृति, यज्ञ की महत्ता और नैतिक जीवन के विषय में विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर बदायूं से गिरधारी सिंह, आवेश कुमार सिंह और सुरेंद्र मौर्य स्वामी शुद्ध बुद्ध आनंद , हरेंद्र आर्य ‘ वीरेंद्र आर्य , विनोद आर्य सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। राजेंद्र सिंह आर्य एवं श्रीमती संध्या आर्य यजमान रहे।
संकल्पों के साथ हुआ समापन
वेद यज्ञ महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। यज्ञ में विश्वकल्याण, सुख-शांति, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्र की उन्नति की कामना की गई। समापन पर श्रद्धालुओं ने सत्य, अच्छाई और सदाचार के मार्ग पर चलने तथा अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का संकल्प लिया। महोत्सव का संदेश रहा कि जीवन में सबसे बड़ी दक्षिणा अपनी बुराइयों का त्याग और सबसे बड़ा धर्म सत्य एवं अच्छाई के मार्ग पर चलना है।
3 दिवसीय वेद महोत्सवशुभ संकल्पों के साथ वेद यज्ञ महोत्सव का समापन

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