बरेली। एसआरएमएस रिद्धिमा में रविवार शाम नृत्य नाटिका ‘देव्यो दयम’ में भरतनाट्यम के गुरुओं और विद्यार्थियों ने ‘महिषासुर मर्दिनी’ का मंचन किया। ‘महिषासुर मर्दिनी’ नृत्य-नाटिका ‘देव्यो दयम’ में राक्षस राजा महिषासुर पर देवी दुर्गा की जीत की अमर कहानी को जीवंत किया गया। कहानी महिषासुर की कठोर तपस्या और भगवान ब्रह्मा से मिले वरदान से शुरू होती है, जिससे उसे अपार शक्ति और अहंकार मिलता है। अहंकार में वह तीनों लोकों पर अपना अत्याचार फैलाता है, देवताओं को हराता है और सृष्टि का संतुलन बिगाड़ देता है। असहाय देवता अपनी दैवीय शक्तियों को एक साथ लाते हैं, जिससे माँ दुर्गा का जन्म होता है, जो साहस, करुणा, शक्ति और धर्म का प्रतीक हैं। दिव्य अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित और देवताओं के आशीर्वाद के साथ, दुर्गा महिषासुर और उसकी विशाल सेना के खिलाफ युद्ध के लिए निकलती हैं। जो एक भीषण टकराव के रूप में शुरू होता है, वह अच्छाई और बुराई, अहंकार और विनम्रता, अंधेरे और दैवीय प्रकाश के बीच एक महायुद्ध बन जाता है। भावपूर्ण अभिनय, लयबद्ध पद-संचालन, दमदार कोरियोग्राफी और प्रभावशाली संगीत के माध्यम से, यह प्रस्तुति अराजकता से दैवीय जागृति तक की यात्रा को दर्शाती है। अंतिम युद्ध महिषासुर के विनाश के साथ समाप्त होता है, जिससे शांति और ब्रह्मांडीय संतुलन बहाल होता है। “महिषासुर मर्दिनी” केवल जीत की कहानी नहीं है—यह शक्ति का उत्सव है, जो हमें याद दिलाता है कि जब भी अंधेरा छाता है, तो संतुलन बहाल करने के लिए दैवीय नारी शक्ति का उदय होता है। इसी कहानी को एसआरएमएस रिद्धिमा में भरतनाट्यम गुरु तान्या भट्टाचार्य, प्रशांत जमतिया एवं भरतनाट्यम के विद्यार्थियों आध्या, शरान्या, अवंतिका, पर्या, वान्या, नएसा, प्रगवी, अमायरा, शांभवी, सानवी, मेहेर, भव्या, अनिका, संस्कृति, चिरान्या, सव्या, तानिशि, अन्वी, आनंशी, जानवी ने नृत्य नाटिका के माध्यम से प्रस्तुत किया। थिएटर गुरु विनाय श्रीवास्तव निर्देशित इस नृत्य नाटिका में संगीत की जिम्मेदारी इंस्ट्रूमेंट गुरु सूर्यकांत चौधरी ने निभाई। गायन गुरु सात्विक मिश्रा ने भी स्वरों के जरिये नृत्य नाटिका में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। नृत्य नाटिका में थिएटर के विद्यार्थियों हरिद्यांश उपाध्याय, विष्णु यादव, दुर्गेश मिश्रा, रचित यादव, प्रथम शर्मा, गोविन्द, आशुतोष, इल्हाम और संजय सिंह ने भी बेहतरीन साथ दिया। इस अवसर पर एसआरएमएस ट्रस्ट के संस्थापक एवं चेयरमैन देव मूर्ति , आशा मूर्ति , उषा गुप्ता, डा.प्रभाकर गुप्ता, डा.अनुज कुमार, डा.शैलेंद्र सक्सेना, डा.रीता शर्मा सहित शहर के गण्यमान्य लोग मौजूद रहे।
जब अंधेरा छाता है, जागती है दैवीय शक्ति

6.7K views

























































































