बदायूं। योग, सात्त्विक आहार, अनुशासित दिनचर्या और सदाचार को अपनाकर ही स्वस्थ, संस्कारवान एवं पर्यावरण के प्रति जागरूक समाज का निर्माण किया जा सकता है। यह संदेश पतंजलि योग समिति एवं भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित प्रातःकालीन योग सभा में पहुंचीं श्रीमती छवि सनातनी आर्य ने दिया। उन्होंने योग साधकों को स्वस्थ जीवनशैली, जल संरक्षण, जैव विविधता, सतत विकास, नैतिक मूल्यों और कर्मफल के सिद्धांतों के प्रति जागरूक करते हुए सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम में भजनों के माध्यम से सामाजिक सद्भाव, मिशन शक्ति और महिला सशक्तीकरण का संदेश भी दिया गया।
अनुशासित दिनचर्या और संतुलित आहार जरूरी
छवि सनातनी आर्य ने कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए केवल योगाभ्यास ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि खानपान और दिनचर्या में अनुशासन भी जरूरी है। व्यक्ति को अपनी शारीरिक आवश्यकताओं के अनुरूप भोजन करना चाहिए तथा समय पर भोजन और पानी पीने की उचित आदतें अपनानी चाहिए। प्राकृतिक जीवनशैली और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता से जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है।
जल और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण जरूरी
जैव विविधता एवं सतत विकास पर विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन आने वाली पीढ़ियों की अमूल्य धरोहर हैं। प्राकृतिक संसाधनों का अनावश्यक दोहन भविष्य में गंभीर संकट पैदा कर सकता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को पानी की बर्बादी रोकने, प्राकृतिक संपदा का विवेकपूर्ण उपयोग करने और पर्यावरण संरक्षण को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाने की जरूरत है।
ईमानदारी और सदाचार को बताया जीवन का आधार
नैतिक मूल्यों पर चर्चा करते हुए उन्होंने रिश्वतखोरी को नैतिक पतन का कारण बताते हुए ईमानदारी, सत्यनिष्ठा और सदाचार अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अनैतिक तरीके से धन अर्जित करने के बजाय व्यक्ति को अपने आचरण से समाज में विश्वास और न्याय की भावना मजबूत करनी चाहिए। अच्छे संस्कार और नैतिक व्यवहार ही स्वस्थ सामाजिक व्यवस्था की नींव हैं।
भीष्म पितामह के प्रसंग से समझाया कर्मफल
महाभारत में भीष्म पितामह के प्रसंग का उल्लेख करते हुए छवि सनातनी आर्य ने कर्मफल के सिद्धांत पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने कर्मों के प्रति सदैव सजग रहना चाहिए। परोपकार, मानव सेवा और सत्कर्मों को जीवन में स्थान देकर समाज के कल्याण में योगदान दिया जा सकता है।
भजनों से दिया महिला जागृति का संदेश
कार्यक्रम के अंतिम चरण में उन्होंने भजनों के माध्यम से सामाजिक जागरूकता, संस्कार, मिशन शक्ति और महिला सशक्तीकरण के विषयों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उनके विचारों ने योग साधकों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, प्रकृति की रक्षा करने और नैतिक मूल्यों के अनुरूप आचरण करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में श्री गिरधारी सिंह राठौर ने छवि सनातनी आर्य का स्वागत किया। इस अवसर पर संजीव चौहान, आवेशपाल सिंह, मुकेश सारस्वत, सतीश सिंह, यश सारस्वत, नैना सारस्वत, पुष्पेंद्र कुमार, विवेक गुप्ता, योगेंद्र पाल सिंह, त्रिवेंद्र, शांति राठौर, अनीता, लवली चौहान, आरपी सिंह, प्रवेश चौहान, उदयवीर सिंह, सौरभ शर्मा, सुरेश चंद्र, दिनेश, वीरेंद्र, राम बहादुर, पुरुषोत्तम और नवल किशोर सहित योग टीम के सदस्य उपस्थित रहे।
योग, सात्त्विक आहार और सत्कर्म से संवरेगा स्वस्थ व संस्कारवान समाज

6.8K views

























































































