बदायूं। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां धीरे-धीरे तेज होने लगी हैं। सत्ता में वापसी की तैयारी कर रही भारतीय जनता पार्टी के संभावित टिकट वितरण को लेकर गुजरात फॉर्मूले की चर्चा ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। चर्चा है कि पार्टी इस बार मौजूदा विधायकों के टिकट पर फैसला करते समय उनके कामकाज, क्षेत्र में सक्रियता, जनता के बीच छवि और संगठन से मिले फीडबैक को विशेष महत्व दे सकती है। मीडिया रिपोर्टों में 100 से अधिक विधायकों के टिकट कटने और 124 विधायकों की रिपोर्ट संतोषजनक नहीं होने का दावा किया गया है। हालांकि, इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और भाजपा ने अभी उत्तर प्रदेश के प्रत्याशियों को लेकर कोई अंतिम सूची जारी नहीं की है। इस राजनीतिक चर्चा का असर बदायूं जिले की तीनों भाजपा विधायक वाली विधानसभा सीटों पर भी स्वाभाविक रूप से देखा जा रहा है। जिले की बदायूं सदर सीट से महेश चंद्र गुप्ता, बिल्सी से हरीश शाक्य और दातागंज से राजीव कुमार सिंह उर्फ बब्बू भैया भाजपा के विधायक हैं। तीनों विधायकों की राजनीतिक पृष्ठभूमि और विधानसभा का अनुभव अलग-अलग है। महेश चंद्र गुप्ता और राजीव कुमार सिंह लगातार दूसरी बार विधानसभा पहुंचे हैं, जबकि हरीश शाक्य ने पहली बार विधायक बनने का सफर तय किया है। ऐसे में आगामी चुनाव से पहले इन सीटों पर उम्मीदवारों के चयन को लेकर होने वाली किसी भी समीक्षा पर राजनीतिक विश्लेषकों और कार्यकर्ताओं की निगाहें रहेंगी। गुजरात के प्रयोग से क्यों हो रही तुलना? भाजपा के गुजरात विधानसभा चुनावों का उदाहरण मौजूदा विधायकों के टिकट बदलने की रणनीति पर चर्चा के दौरान दिया जाता है। वर्ष 2022 के गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 182 में से 156 सीटें जीतकर ऐतिहासिक प्रदर्शन किया था। चुनाव से पहले पार्टी ने कई मौजूदा विधायकों के टिकट बदले थे। इसे पार्टी की चुनावी रणनीति के महत्वपूर्ण हिस्सों में गिना गया, हालांकि चुनाव परिणामों के पीछे संगठन, नेतृत्व, प्रचार, स्थानीय परिस्थितियों और उम्मीदवार चयन सहित कई कारक थे। अब उत्तर प्रदेश में भी इसी तरह का प्रयोग किए जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं। लेकिन गुजरात और उत्तर प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए वहां के प्रयोग को यहां लागू किए जाने या समान परिणाम मिलने की गारंटी नहीं मानी जा सकती।
पिछले चुनाव के आंकड़े भी होंगे अहम। वर्ष 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 255 सीटें जीती थीं, जबकि उसके सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) और निषाद पार्टी ने क्रमशः 12 और छह सीटें हासिल की थीं। बदायूं की तीनों सीटों पर भी भाजपा के उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी। बदायूं सदर में महेश चंद्र गुप्ता ने सपा के रईस अहमद को 11,179 मतों से, बिल्सी में हरीश शाक्य ने सपा के चंद्र प्रकाश मौर्य को 25,115 मतों से और दातागंज में राजीव कुमार सिंह ने सपा के अर्जुन सिंह को 9,476 मतों से हराया था। ये आंकड़े पिछले चुनाव की स्थिति बताते हैं, लेकिन आगामी चुनाव में टिकट मिलने या चुनावी परिणाम का पूर्वानुमान नहीं हैं। रिपोर्ट कार्ड, जनसंपर्क और संगठन की भूमिका महत्वपूर्ण। यदि भाजपा मौजूदा विधायकों की विस्तृत समीक्षा करती है तो क्षेत्र में विकास कार्य, जनता की समस्याओं पर प्रतिक्रिया, कार्यकर्ताओं के साथ तालमेल, स्थानीय मुद्दों पर सक्रियता और पिछले चुनाव के प्रदर्शन जैसे पहलू चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं। बदायूं में भी इन कसौटियों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो सकती हैं। हालांकि, लगातार दूसरी बार विधायक बनने वाले नेताओं और पहली बार विधानसभा पहुंचे विधायक के लिए अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियां हैं। केवल कार्यकाल या किसी अपुष्ट सर्वे के आधार पर किसी का टिकट कटने की बात कहना उचित नहीं होगा। फिलहाल बदायूं सदर, बिल्सी और दातागंज में भाजपा के किसी मौजूदा विधायक का टिकट काटने या उम्मीदवार बदलने की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। गुजरात फॉर्मूले और टिकटों की संभावित समीक्षा को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच अब सबकी निगाहें भाजपा के आगामी संगठनात्मक फैसलों पर रहेंगी। अंतिम तस्वीर पार्टी नेतृत्व की समीक्षा और प्रत्याशी चयन की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।
भाजपा के गुजरात फार्मूले से बदायूँ के तीन विधायकों समेत यूपी के 100 विधायक टेंशन में, धड़कने बढ़ी, पसीना आया

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