बरेली। मंडलीय सड़क सुरक्षा समिति की वर्ष 2026 की तृतीय बैठक मंगलवार को मंडलायुक्त सभागार में आयुक्त बरेली मंडल की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में बरेली मंडल के सभी जनपदों के जिला स्तरीय एवं मंडलीय अधिकारियों के साथ एनएचएआई, लोक निर्माण विभाग, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, यातायात पुलिस, परिवहन, स्वास्थ्य, शिक्षा, पंचायती राज, पशुपालन, गन्ना विभाग समेत अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में मंडल में सड़क दुर्घटनाओं की स्थिति, ब्लैक स्पॉट, दुर्घटना संभावित स्थलों, विद्यालयी वाहनों की सुरक्षा, आवारा पशुओं की समस्या और सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियानों की विस्तार से समीक्षा की गई।बैठक के दौरान बदायूं, पीलीभीत और शाहजहांपुर में सड़क दुर्घटनाओं तथा दुर्घटनाओं में मृतकों की संख्या में वृद्धि पर आयुक्त ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहें, बल्कि धरातल पर परिणामपरक कार्रवाई सुनिश्चित करें।मीडिया को सड़क सुरक्षा अभियान से जोड़ने पर जोरआयुक्त ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल यातायात पुलिस की कार्रवाई या सड़कों के इंजीनियरिंग सुधार तक सीमित विषय नहीं है। जनजागरूकता सड़क सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया के माध्यम से सड़क सुरक्षा संदेशों को व्यापक स्तर पर प्रसारित करने पर जोर दिया।उन्होंने कहा कि दुर्घटना संभावित स्थानों, क्रिटिकल कॉरिडोर, हेलमेट और सीट बेल्ट के इस्तेमाल, तेज गति से वाहन चलाने, नशे में ड्राइविंग तथा विद्यालयी वाहनों की सुरक्षा को लेकर लगातार जागरूकता अभियान चलाए जाएं। इन अभियानों को जन-आंदोलन का रूप देने के लिए मीडिया संस्थानों का सक्रिय सहयोग लिया जाए।
आयुक्त ने सड़क दुर्घटनाओं से जुड़ी खबरों के प्रकाशन को भी तथ्यपरक, संवेदनशील और जिम्मेदार तरीके से करने की अपील की, ताकि दुर्घटनाओं की जानकारी के साथ-साथ लोगों में सुरक्षित यातायात व्यवहार की भावना भी विकसित हो। ग्राम सड़क सुरक्षा समितियों, शैक्षणिक संस्थानों और विभिन्न विभागों की ओर से चलाए जा रहे सफल सड़क सुरक्षा अभियानों और जागरूकता गतिविधियों को भी मीडिया के माध्यम से प्रमुखता से प्रचारित करने के निर्देश दिए।
बरेली में जिला और ग्रामीण मार्गों पर ज्यादा हादसे..
समीक्षा में सामने आया कि जनपद बरेली में राष्ट्रीय राजमार्गों की तुलना में अन्य जिला मार्गों और ग्रामीण मार्गों पर अधिक सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। इस पर आयुक्त ने लोक निर्माण विभाग और ग्रामीण अभियंत्रण विभाग को निर्देश दिए कि सभी दुर्घटना संभावित स्थलों का चिन्हांकन कर उन्हें ए, बी और सी श्रेणी में वर्गीकृत किया जाए।उन्होंने प्राथमिकता के आधार पर इन स्थानों पर ज्यामितीय सुधार, सड़क की दृश्यता बढ़ाने, संकेतक बोर्ड लगाने, रम्बल स्ट्रिप सहित अन्य आवश्यक सड़क सुरक्षा कार्य कराने के निर्देश दिए।
बदायूं में ब्लैक स्पॉट पर संयुक्त निरीक्षणजनपद बदायूं की समीक्षा के दौरान आयुक्त ने एनएचएआई, यातायात पुलिस और परिवहन विभाग को संयुक्त रूप से काम करने के निर्देश दिए। दुर्घटना संभावित स्थलों पर आवश्यक सुधारात्मक कार्य कराने के साथ ही ब्लैक स्पॉट पर लंबित कार्यों को लेकर संयुक्त निरीक्षण करने और जल्द से जल्द सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया।
पीलीभीत में NH-731K को चार लेन करने का प्रस्ताव..
पीलीभीत जनपद में NH-731K पर अधिक सड़क दुर्घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस मार्ग को चार लेन किए जाने के लिए आवश्यक प्रस्ताव उच्च स्तर पर भेजा जाए।उन्होंने कहा कि जब तक मार्ग के चौड़ीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सभी आवश्यक अंतरिम सड़क सुरक्षा उपाय तत्काल सुनिश्चित किए जाएं।
शाहजहांपुर में आवारा पशुओं पर जीरो टॉलरेंस..
शाहजहांपुर में सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों में आवारा पशुओं की समस्या सामने आने पर आयुक्त ने एनएचएआई, यातायात पुलिस, परिवहन विभाग और पशुपालन विभाग को संयुक्त कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए।उन्होंने स्पष्ट कहा कि सड़कों और राजमार्गों पर आवारा पशुओं की मौजूदगी को रोकने के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाए और इसके लिए लगातार अभियान चलाया जाए, ताकि रात के समय होने वाली दुर्घटनाओं को कम किया जा सके।
ब्लैक स्पॉट की रिपोर्ट समय से देने के निर्देश..
मंडल के सभी ब्लैक स्पॉट और दुर्घटना संभावित स्थलों पर चल रहे सुधारात्मक कार्यों की समीक्षा करते हुए आयुक्त ने सभी कार्यदायी संस्थाओं को अपने-अपने क्षेत्रों में किए गए तथा प्रस्तावित कार्यों की अद्यतन और तथ्यात्मक रिपोर्ट समय से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इससे इन कार्यों की नियमित समीक्षा की जा सकेगी और लापरवाही की स्थिति में जिम्मेदारी तय की जा सकेगी।
गांवों में पंचायत सचिव होंगे सड़क सुरक्षा समिति के सह-सचिव..
ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आयुक्त ने ग्राम सड़क सुरक्षा समिति में पंचायत सचिव को सह-सचिव नामित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही ग्राम स्तर पर दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान, जागरूकता कार्यक्रमों और सड़क सुरक्षा गतिविधियों को प्रभावी बनाने के लिए सहायक विकास अधिकारी (ADO) और खंड शिक्षा अधिकारी (ABSA) को मास्टर ट्रेनर के रूप में नामित करने को कहा।
सोलैशियम योजना के लंबित मामलों का होगा निस्तारणबैठक में सोलैशियम योजना के तहत लंबित मामलों की भी समीक्षा की गई। आयुक्त ने सभी सहायक संभागीय परिवहन अधिकारियों (प्रवर्तन) को निर्देश दिए कि वे संबंधित विभागीय अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर लंबित प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण कराएं, ताकि पात्र दुर्घटना पीड़ित परिवारों को समय से सहायता उपलब्ध हो सके।
स्कूली वाहनों की जांच में लापरवाही नहीं..
विद्यालयी विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर भी आयुक्त ने सख्त निर्देश दिए। उन्होंने विद्यालय वाहनों के खिलाफ चल रहे निरीक्षण और प्रवर्तन अभियान को लगातार जारी रखने को कहा। वाहनों में फिटनेस, परमिट, बीमा, प्रदूषण प्रमाण-पत्र, सीसीटीवी, जीपीएस, स्पीड गवर्नर समेत निर्धारित सभी सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए।
गन्ना वाहनों पर लाल रिफ्लेक्टिव कपड़ा अनिवार्यआगामी गन्ना पेराई सत्र को देखते हुए आयुक्त ने गन्ना विभाग को विशेष सड़क सुरक्षा अभियान चलाने के निर्देश दिए। गन्ना परिवहन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों के पीछे की पूरी चौड़ाई को ढकते हुए लाल परावर्तक चमकीला कपड़ा (Reflective Cloth) बंधवाने के निर्देश दिए गए।इसका उद्देश्य रात के समय गन्ना लदे वाहनों की दृश्यता बढ़ाना और पीछे से होने वाली टक्कर जैसी दुर्घटनाओं की संभावना को कम करना है।
5E मॉडल से सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने पर जोर..
बैठक के अंत में आयुक्त ने सभी विभागों को सड़क सुरक्षा के 5E मॉडल—Engineering, Enforcement, Education, Emergency Care और Evaluation/Data Analysis के अनुरूप समन्वित रूप से कार्य करने के निर्देश दिए।उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं बल्कि साझा दायित्व है। इंजीनियरिंग सुधार, प्रभावी प्रवर्तन, जनजागरूकता, दुर्घटना के बाद बेहतर आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था और आंकड़ों के आधार पर लगातार समीक्षा—इन सभी क्षेत्रों में एक साथ काम करके ही सड़क दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली मौतों की संख्या में प्रभावी कमी लाई जा सकती है।


























































































