Matru Navami Shraddha 2026 Rules: पितृ पक्ष के दौरान आने वाली मातृ नवमी (Matru Navami) का विशेष महत्व है। यह तिथि विशेष रूप से परिवार की दिवंगत महिलाओं और सुहागिन पूर्वजों को समर्पित होती है। इस साल मातृ नवमी 04 अक्टूबर 2026 को है।
यदि आप इस साल पहली बार मातृ नवमी का श्राद्ध करने जा रहे हैं, तो कुछ जरूरी नियमों और धार्मिक परंपराओं का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है। अक्सर लोग जानकारी के अभाव में कुछ खास रीतियां भूल जाते हैं, आइए जानते हैं वे 5 जरूरी बातें जो आपको जरूर नोट करनी चाहिए।
1. पंचबलि कर्म है बेहद जरूरी
मातृ नवमी के दिन पंचबलि कर्म (Panchabali Karma) करना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। सुहागिन महिलाओं के श्राद्ध में भोजन के पांच हिस्से निकाले जाते हैं।
- भोजन को बरगद के पत्ते पर रखकर गाय, कौए, कुत्ते, चींटी और देवताओं को अर्पित करें।
- कई लोग इस नियम को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन श्राद्ध की पूर्णता के लिए यह कर्म करना अनिवार्य है।
2. तुलसी पूजन और सुहाग सामग्री अर्पित करें
मातृ नवमी के पावन दिन पर तुलसी माता की पूजा का विशेष विधान है।
- तुलसी पूजन के साथ उन्हें सुहाग की सामग्री (जैसे लाल चुनरी, चूड़ी आदि) जरूर अर्पित करें।
- ऐसा करने से दिवंगत पूर्वजों की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
3. सुहागिन स्त्री को श्रृंगार का दान दें
यदि आप किसी सुहागिन महिला पूर्वज का श्राद्ध कर रहे हैं, तो मातृ नवमी के दिन किसी ब्राह्मणी या जरूरतमंद सुहागिन स्त्री को श्रृंगार सामग्री का दान अवश्य करें।
- दान में आप लाल साड़ी, कुमकुम, सिंदूर, चूड़ियाँ और बिछिया जैसी वस्तुएं दे सकती हैं। इस दान के बिना मातृ नवमी का श्राद्ध अधूरा माना जाता है।
4. कुतुप मुहूर्त (Kutup Muhurat) में करें तर्पण
पहली बार श्राद्ध करने वालों को समय का खास ध्यान रखना चाहिए।
- श्राद्ध कर्म के लिए कुतुप मुहूर्त सबसे उत्तम माना जाता है। महिलाओं का श्राद्ध इसी मुहूर्त में करना श्रेष्ठ फलदायी होता है।
- इस दौरान दोनों हाथों की अंजुली में जल लें, उसमें काले तिल मिलाएं और अपने पूर्वजों का स्मरण करते हुए तर्पण करें।
5. गाय के गोबर के उपले से करें हवन
मातृ नवमी के दिन दिवंगत महिलाओं को पृथ्वी लोक से विदा किया जाता है।
- इस दिन गाय के गोबर के उपले (कंडे) से हवन जरूर करना चाहिए।
- हवन कुंड में खीर और पूड़ी के पांच टुकड़े डालकर अग्नि में आहुति दें। ऐसा माना जाता है कि उपले के धुएं के माध्यम से ही भोजन सूक्ष्म रूप में पूर्वजों तक पहुंचता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
यदि आप या आपके परिवार में कोई पहली बार मातृ नवमी का श्राद्ध कर रहा है, तो इन 5 बातों का विशेष ध्यान रखें। विधि-विधान से किए गए श्राद्ध से पितृगण तृप्त होते हैं और परिवार को समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।


























































































