बदायूं। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में प्री-प्राइमरी एवं बाल वाटिका की वार्षिक गतिविधियों पर आधारित एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला उप शिक्षा निदेशक एवं प्राचार्य राकेश कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित हुई। इसमें बाल वाटिका स्तर से बच्चों के सीखने की मजबूत नींव तैयार करने, उनकी बुनियादी क्षमताओं के विकास तथा प्रारंभिक शिक्षा को प्रभावी बनाने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए प्राचार्य राकेश कुमार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के परिप्रेक्ष्य में ईसीसीई (Early Childhood Care and Education) एजुकेटर की भूमिका और महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बाल्यावस्था बच्चों के समग्र विकास की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण चरण है। इस स्तर पर बच्चों को अनुकूल वातावरण, उचित मार्गदर्शन और गतिविधि आधारित सीखने के अवसर उपलब्ध कराकर उनकी प्रारंभिक क्षमताओं को मजबूत किया जा सकता है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी नवीन कुमार ने ईसीसीई एजुकेटर के विभागीय कार्यों एवं दायित्वों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बाल वाटिका एवं प्रारंभिक कक्षाओं में बच्चों की जरूरतों के अनुरूप शैक्षिक गतिविधियों को प्रभावी ढंग से संचालित करने पर जोर दिया। वरिष्ठ प्रवक्ता उमेंद्र दत्त त्रिपाठी ने बाल वाटिका को प्रभावी शिक्षण की आधारशिला बताते हुए इसे और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर चर्चा की।
कार्यशाला के नोडल अधिकारी दिलीप कुमार ने आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने बाल वाटिका से प्रारंभिक कक्षाओं तक बच्चों के सीखने की निरंतरता बनाए रखने तथा उनके समग्र विकास के लिए आवश्यक शैक्षिक गतिविधियों पर चर्चा की। उन्होंने गतिविधि-आधारित एवं बाल-केंद्रित शिक्षण पद्धति को अपनाने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि बच्चों को सीखने के लिए सहज और रुचिकर वातावरण उपलब्ध कराया जाना आवश्यक है।
कार्यशाला में एसआरजी जसबीर, पीयूष एवं सुधा, एआरपी चेतन चहर तथा नोडल शिक्षक अजीत ने भी सक्रिय सहयोग किया। प्रतिभागियों ने बाल वाटिका एवं प्रारंभिक कक्षाओं में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रभावी शैक्षिक गतिविधियों को अपनाने की आवश्यकता पर अपने विचार साझा किए।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बाल वाटिका स्तर से ही बच्चों के सीखने की मजबूत नींव तैयार करना, उनकी बुनियादी क्षमताओं का विकास करना और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा को बढ़ावा देना रहा। आयोजन के दौरान शिक्षकों एवं संबंधित कार्मिकों को बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, सहज और बाल-केंद्रित बनाने के लिए प्रेरित किया गया।
बाल वाटिका से मजबूत होगी बच्चों की सीखने की नींव, डायट में हुई कार्यशाला

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