बदायूं। यदि लक्ष्य निर्धारित कर पूरी लगन और मेहनत के साथ उसकी प्राप्ति के लिए प्रयास किया जाए तो सफलता हासिल करना मुश्किल नहीं होता। बदायूं के सहायक कोषाधिकारी (एटीओ) रामबहादुर राजपूत के बड़े पुत्र डॉक्टर दिव्यांश राजपूत ने इसे अपनी सफलता से साबित कर दिखाया है। बचपन से ही मेधावी रहे डॉक्टर दिव्यांश राजपूत ने एमबीबीएस के बाद प्रथम प्रयास में ही नीट-पीजी परीक्षा में सफलता हासिल करते हुए ऑल इंडिया में 2293वीं रैंक प्राप्त की है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार में खुशी का माहौल है और शुभचिंतकों एवं परिचितों ने उन्हें बधाई दी है।डॉक्टर दिव्यांश राजपूत का वर्ष 2020 में प्रथम प्रयास में ही एमबीबीएस के लिए चयन हुआ था। उन्होंने एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की और कुछ माह पूर्व ही एमबीबीएस की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएट की परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। पढ़ाई के प्रति गंभीरता और लक्ष्य के प्रति समर्पण के चलते उन्हें अपनी मेहनत पर पूरा भरोसा था। गुरुवार को नीट-पीजी परीक्षा का परिणाम घोषित होने पर उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने ऑल इंडिया में 2293वीं रैंक हासिल कर ली।
छोटे भाई का भी प्रथम प्रयास में एमबीबीएस में चयन
डॉक्टर दिव्यांश राजपूत की सफलता की खुशी को उनके छोटे भाई सक्षम राजपूत की उपलब्धि ने भी दोगुना कर दिया है। सक्षम राजपूत भी मेधावी छात्र रहे हैं और इसी वर्ष प्रथम प्रयास में उनका एमबीबीएस के लिए चयन हुआ है। उन्हें राजकीय मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिला है। दोनों भाइयों की शैक्षिक उपलब्धियों से परिवार में उत्साह और खुशी का माहौल है।
नीट-पीजी में सफलता मिलने पर डॉक्टर दिव्यांश राजपूत ने कहा कि किसी भी लक्ष्य को हासिल करने के लिए मेहनत के साथ तैयारी पर पूरा फोकस रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति अपना लक्ष्य तय कर ईमानदारी से लगातार मेहनत करे तो सफलता अवश्य मिलती है। उन्होंने बताया कि पोस्ट ग्रेजुएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह सिविल सर्विसेज की तैयारी करना चाहते हैं।
माता-पिता को दिया सफलता का श्रेय
डॉक्टर दिव्यांश राजपूत ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को दिया। उन्होंने कहा कि उनकी मां प्रतिभा सिंह और पिता रामबहादुर राजपूत ने हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और हर कदम पर उनका सहयोग किया। प्रतिभा सिंह बेसिक शिक्षा विभाग में अध्यापक हैं, जबकि रामबहादुर राजपूत बदायूं कोषागार में सहायक कोषाधिकारी के पद पर कार्यरत हैं।
डॉक्टर दिव्यांश ने कहा कि हर माता-पिता अपने बच्चों से बड़ी उम्मीदें रखते हैं और उनके भविष्य को लेकर अनेक सपने देखते हैं। बच्चों का भी दायित्व है कि वे अपने माता-पिता के सपनों को पूरा करने के लिए पूरी मेहनत और लगन से पढ़ाई करें।
बड़ों के आशीर्वाद को बताया अपनी ऊर्जा
डॉक्टर दिव्यांश राजपूत ने अपनी सफलता में परिवार के बुजुर्गों के आशीर्वाद को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि उनके बाबा बद्री सिंह, दादी रेशम देवी, नाना ओमप्रकाश राजपूत और नानी शीलवाला समेत परिवार के सभी बड़ों का आशीर्वाद उन्हें लगातार मिलता रहा है। उन्होंने कहा कि बड़ों का आशीर्वाद उनके लिए हमेशा ऊर्जा और प्रेरणा का स्रोत रहा है।
डॉक्टर दिव्यांश राजपूत की नीट-पीजी में सफलता पर परिवार के लोगों, रिश्तेदारों, परिचितों और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
एमबीबीएस के बाद प्रथम प्रयास में ही नीट-पीजी में सफलता, डॉक्टर दिव्यांश राजपूत ने ऑल इंडिया में हासिल की 2293वीं रैंक


























































































