बरेली। एमडीआर लागू किए जाने को लेकर व्यापारियों में दहशत का माहौल बना हुआ है। एमडीआर को जहां एक ओर आम उपभोक्ताओं से दूर रखा गया है, तो वही व्यापारी एमडीआर को अपने गले की फांस मान रहे हैं। और इसी के चलते आज बरेली में
यूपीआई से होने वाले चुनिंदा व्यापारी लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किए जाने के विरोध मे व्यापारियों ने जन-जागरूकता अभियान शुरू किया है। भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के पदाधिकारियों ने आलमगीरीगंज में व्यापारियों और लोगों के बीच पंपलेट वितरित कर MDR को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। व्यापारियों ने सरकार से इस शुल्क पर पुनर्विचार कर इसे वापस लेने की मांग की है। भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के प्रांतीय उपाध्यक्ष सतीश चंद्र अग्रवाल ने कहा कि व्यापारी पहले से ही ऑनलाइन कारोबार और बाजार में मंदी की स्थिति से प्रभावित हैं। ऐसे में UPI पर MDR लगाए जाने से व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। उन्होंने कहा कि संगठन की मांग है कि 0.4 प्रतिशत MDR शुल्क तत्काल वापस लिया जाए। उन्होंने बताया कि अभियान के तहत अलग-अलग बाजारों में पंपलेट वितरित किए जा रहे हैं और सांसद के माध्यम से वित्त मंत्री को भी ज्ञापन भेजकर इस व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग की गई है।
व्यापारी नेता ने कहा कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के बाद अब उस पर शुल्क लगाने से व्यापारी और ग्राहक दोनों प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने सरकार से मंदी के दौर में व्यापारियों को राहत देने और डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क से बचाने की मांग की।
वहीं भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के प्रदेश वरिष्ठ महामंत्री अनिल अग्रवाल ने कहा कि व्यापारियों ने बड़ी मुश्किल से UPI को अपने कारोबार का हिस्सा बनाया है और गांव-देहात तक डिजिटल भुगतान की आदत पहुंची है। ऐसे में 0.4 प्रतिशत MDR लागू करना व्यापारियों के हित में नहीं है। उन्होंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से व्यापारियों की मांग पर तत्काल पुनर्विचार कर MDR को वापस लेने की अपील की।
अनिल अग्रवाल ने बताया कि संगठन की ओर से चार दिन का जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत सर्राफा बाजार, इलेक्ट्रिकल-इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट, बांसमंडी हार्डवेयर मार्केट, सिविल लाइंस और सुभाष नगर समेत विभिन्न बाजारों में व्यापारियों को MDR के प्रभाव के बारे में जानकारी दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त लागत का प्रभाव व्यापारियों तक पहुंचता है तो व्यापारी नकद लेनदेन की ओर लौट सकते हैं। उनके अनुसार इससे व्यापारियों की सुरक्षा और बाजार में नकदी के प्रवाह से जुड़ी पुरानी समस्याएं फिर सामने आ सकती हैं। हालांकि, केंद्र सरकार के 15 सितंबर 2026 के आधिकारिक स्पष्टीकरण के अनुसार 0.4 प्रतिशत MDR सभी UPI लेनदेन पर लागू नहीं है। यह 2,000 रुपए से अधिक के निर्धारित P2M यानी ग्राहक से व्यापारी को होने वाले लेनदेन पर लागू है। 2,000 रुपए तक के व्यापारी भुगतान और निर्धारित शून्य-MDR श्रेणी में आने वाले छोटे व्यापारियों के लेनदेन पर MDR नहीं लगाया जाएगा। सरकार के अनुसार लगभग 96 प्रतिशत व्यापारी लेनदेन इस MDR से प्रभावित नहीं होंगे। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि MDR ग्राहक से वसूलने वाला शुल्क नहीं है और व्यापारियों को इसे ग्राहक पर डालने से रोकने के लिए बैंकों को निर्देश दिए गए हैं।
UPI पर 0.4% MDR के विरोध में व्यापारी बोले- यह शुल्क वापस ले सरकार


























































































