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देशभक्ति की मिसाल : बस स्टैंड पर मांगने वाले बच्चों ने दिखाया राष्ट्रप्रेम का अद्भुत जज्बा

May 29, 2025By admin0 comments
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बदायूं : गरीब बच्चों में भी कुछ कर गुजरने की ललक होती है। उमंग और उत्साह से भरपूर होते हैं। शिक्षित होकर एक अच्छा मुकाम हासिल करें, यह उनकी इच्छा और आकांक्षा रहती है। लेकिन पेट भरने के लिए बच्चों को शिक्षा से दूर मांग मांगकर दो वक्त की रोटी जुटानी पड़ती है। बस स्टैंड पर पैसे मांगकर कर अपना घर का खर्चा चलाने वाले बच्चों में देशभक्ति का अनोखा जज्बा देखने को मिला। बच्चों ने भारत माता के जयकारे के साथ एक बनेंगे, नेक बनेंगे। हम सुधरेंगे जग सुधरेगा के जयकारे भी लगाए। देशभक्ति से ओतप्रोत भारत माता को सैल्यूट किया और जोश खरोश के साथ जयहिंद बोला। बच्चों में देशभक्ति देख सभी का मन प्रफुल्लित हो गया। स्काउट संस्था के पूर्व जिला ट्रेनिंग कमिश्नर संजीव कुमार शर्मा ने बच्चों को सैल्यूट सिखाया। देशभक्ति का पाठ पढ़ाया। बच्चों में अतुलनीय ऊर्जा देखी गई। हर बच्चे ने देशभक्ति के नारे लगाए और भारत माता को प्रणाम किया। जहाँ पेट की आग बच्चों को स्कूल से दूर कर देती है, वहाँ दिल में जल रही देशभक्ति की लौ समाज को आईना दिखा रही है। शहर के भीड़भाड़ वाले बस स्टैंड पर गुरुवार के दिन कुछ ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने हर राहगीर का दिल छू लिया। फटे पुराने कपड़ों, हाथों में कटोरा लिए, जिन बच्चों को हम रोज नजरअंदाज कर आगे बढ़ जाते हैं। उन्हीं बच्चों ने जब “भारत माता की जय” और “जय हिंद” के नारों से आसमान गूंजा दिया, तो हर आंख नम हो गई और हर दिल गर्व से भर गया।
ये वे बच्चे हैं, जिनकी उम्र खेलने-कूदने और पढ़ाई करने की होती है, लेकिन हालात ने इन्हें भीख मांगने पर मजबूर कर दिया है। इनका जीवन अभावों से भरा है। पेट भरने की चिंता, सोने की जगह खुला आसमान और शिक्षा से कोसों दूर होने की पीड़ा। फिर भी दिल है हिन्दुस्तानी, इन बच्चों के भीतर देश के लिए जो जुनून, जो आत्मीयता दिखी, वह किसी सैनिक की सलामी से कम नहीं है। बिना किसी मंच, बिना किसी आयोजन के, इन बच्चों ने गर्व से तने हुए सीने और उठे सिर से भारत माता को सैल्यूट किया। उनके गले से निकला “एक बनेंगे, नेक बनेंगे”, “हम सुधरेंगे, जग सुधरेगा”, सिर्फ नारे नहीं एक संकल्प है। यह दृश्य केवल भावुक करने वाला नहीं, बल्कि झकझोर देने वाला था। सोचिए, जब शिक्षा, भोजन और आश्रय से वंचित ये मासूम बच्चे राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत होकर जयकारे लगा सकते हैं, तो फिर समाज में बैठे हम लोग क्या कर रहे हैं? क्या हमने कभी सोचा कि इन बच्चों को भी एक किताब, एक शिक्षक, एक अवसर मिल जाए तो वे भी डाक्टर, शिक्षक, सोफिया और व्योमिका जैसी सैनिक या देश के कर्णधार बन सकते हैं? इन बच्चों की आंखों में केवल भूख नहीं, उनमें सपने हैं, उम्मीदें हैं और सबसे बढ़कर, देश को बेहतर बनाने की भावना है। इनके नारे सिर्फ शब्द नहीं, एक क्रांति की दस्तक हैं, एक बदलाव की पुकार, जो कहती है कि “अगर हमें मौका मिले, तो हम भी कुछ कर गुजर सकते हैं।” हम समाज के जिम्मेदार नागरिक बनें। इन बच्चों को दया नहीं, अधिकार दें। भीख नहीं, शिक्षा दें। तिरंगे को सलामी देने वाले इन मासूमों को कलम पकड़ाएं। देश के होनहार नागरिक बनाएं।

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