उर्स-ए-तहसीनी में सभी सुन्नियों से इत्तेहाद और सुलह कुल्लियत से परहेज़ का पैग़ाम

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बरेली। आला हज़रत ख़ानदान की अज़ीम शख़्सियत सदरउल उलमा मुहद्दिस-ए-बरेलवी मज़हर-ए-मुफ़्ती-ए-आज़म हिंद हज़रत अल्लामा तहसीन रज़ा ख़ाँ साहब के उर्स के दूसरे दिन इत्तेहाद-ए-अहल-ए-सुन्नत व रद्दे सुलहेकुल्लियत कॉन्फ्रेंस हुई। इससे पहले दिनभर चादरों के जुलूस मज़ार शरीफ़ पर पहुँचते रहे। अब 19 जनवरी को दोपहर 12.30 बजे क़ुल शरीफ होगा। उर्स की तमाम तक़रीबात साहिब-ए-सज्जादा हज़रत हस्सान रज़ा ख़ाँ नूरी की सरपरस्ती में हो रही हैं। उर्स के दूसरे दिन फ़ज्र की नमाज़ के बाद सूफ़ी टोला से जामिया मुफ्ती-ए-आज़म हिंद के तलबा को नवाब मियां तहसीनी ने ला कर ख़ानक़ाह-ए-तहसीनिया पर क़ुरानख्वानी कराई। सलातो सलाम और फातिहा के बाद क़ारी रेहान रज़ा साहब ने दुआ की। इसके बाद दिन भर हजियापुर, सैलानी, रबड़ी टोला, मदीना शाह, ईंटपज चौराहा, कटरा चाँद ख़ाँ, नवादा शेख़ान, बाकर गंज, सुर्खा बान खाना देवचरा वग़ैरह से अक़ीदतमंद अदबो-एहतराम के साथ चादरों के जुलूस लेकर ख़ानक़ाह-ए-तहसीनिया पहुँचे। मग़रिब की नमाज़ के बाद मौलाना डॉ. शकील मिस्बाही साहब ने उलामा, तलबा और अक़ीदतमंदों के साथ हलक़ा-ए-ज़िक्र का एहतमाम किया।जिसमें साहिबे सज्जादा ने बाद में दुआ फरमाई। हल्का ए ज़िक्र के बाद दरगाह शरीफ़ पर एहसान रज़ा की तरफ से साहिबे सज्जादा के दस्ते मुबारक से सेहरा पेश किया गया, इशा की नमाज़ के बाद साहिब-ए-सज्जादा हज़रत हस्सान रज़ा ख़ाँ नूरी की सरपरस्ती में ख़ानक़ाह शरीफ़ के पास चौक में इत्तेहाद-ए-अहल-ए-सुन्नत व रद्दे सुलहेकुल्लियत कॉन्फ्रेंस शुरू हुई। कारी नदीम शेख़ कश्मीरी ने तिलावत से कॉन्फ्रेंस का आगाज़ किया। इस मौक़े पर क़ाज़ी शहीद आलम साहब, क़ारी अब्दुर्रहमान ख़ाँ साहब, मौलाना डॉ. शकील मिस्बाही साहब व दीगर उलामा ने ख़िताब फ़रमाया। मुफ़्ती शहज़ाद आलम साहब की ख़ुसूसी तक़रीर हुई। उलामा ने सभी सुन्नियों से इत्तेहाद और सुलह कुल्लियत से परहेज़ का ख़ास पैग़ाम दिया। नातो-मनक़बत के नज़राने पेश करने वालों में नईम तहसीनी, आज़म तहसीनी, शाहरुख़ तहसीनी, इश्तयाक़ अहमद तहसीनी,महताब सिब्तैनी, गयास खां व दीगर नातख़्वाँ शामिल रहे। आख़िर में रात 1 बजकर 40 मिनट पर मुफ़्ती-ए-आज़म हिंद का क़ुल शरीफ़ हुआ। कुल शरीफ से पहले यादगारे तहसीने मिल्लत जामिया तहसीनिया ज़िया उल उलूम से फारिग होने वाले तलबा की दस्तार बंदी का हसीन मंज़र पेश किया गया। साहिब-ए-सज्जादा हज़रत हस्सान रज़ा ख़ाँ नूरी ने ख़ुसूसी दुआ फ़रमाई। इस मौक़े पर जानशीन-ए-तहसीन-ए-मिल्लत सूफ़ी रिज़वान रज़ा ख़ाँ, ख़ानक़ाह-ए-तहसीनिया के मुहतमिम इंजीनियर सुहेब रज़ा ख़ाँ, नायब सज्जादानशीं मौलाना सफ़वान रज़ा ख़ाँ, अमान रज़ा ख़ाँ, हाजी यूसुफ़ साहब व ख़ानवादा-ए-आला हज़रत की कई हस्तियाँ मौजूद रहीं। कॉन्फ्रेंस का संचालन क़ारी नाज़िर रज़ा ने किया। अब 19 जनवरी को उर्स के तीसरे और आख़िरी दिन ख़ानक़ाह शरीफ़ के पास चौक में सुबह को हुस्सामुल हरमैन कॉन्फ्रेंस होगी। दोपहर 12.30 बजे हुज़ूर तहसीने मिल्लत का क़ुल शरीफ़ होगा। कुल शरीफ से पहले तहसीनी कौमी एजेंडा पेश किया जाएगा।

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