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Uttar Pradesh

रामजी शरण सक्सेना एडवोकेट की प्रेरणा से निरंकार सेवक कवि से बने वकील ! — निर्भय सक्सेना–

June 8, 2022By sharad kumar0 comments
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बरेली । स्वर्गीय बाबू रामजी शरण सक्सेना बरेली ही नहीं प्रदेश के एक जाने माने एडवोकेट ही नहीं अच्छे कवि भी थे। उनकी ही प्रेरणा से प्रसिद्ध कवि निरंकार देव सेवक कवि से वकील बन गए और रामजी शरण प्रसिद्ध एडवोकेट से कवि हो गए। उनके यहां देश के जाने माने कवियों का आना जाना होता रहता था। डॉ हरिवंश राय बच्चन जी रामजी शरण के मित्र थे। बाबू रामजी शरण सिविल लाइन, बरेली आवास ‘नीलकमल’ के विषय में देश के सुप्रसिद्ध गीतकार स्व. भारत भूषण जी (मेरठ) कहते थे कि यह वही घर है जहां गीतऋषि स्व. नीरज जी की कविता पूर्णिमा सी गुनगुनाती है । तब यहां गमलों में गीत खिलते थे । बेलों में गीत झूलते थे । आंगन में गीत टहलते थे और छत पर गीत चहचहाते थे ।

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रामजी शरण जी की एक कविता इस प्रकार थी — याद जब आती है उनकी ए सरन, हो जाता हूँ बेखबर दुनिया से। रामजी शरण ने अपनी पहली पत्नी को समर्पित ताजमहल नामक अपनी कविता कुछ इस तरह कही — ए महलों के सरताज महल, ए यमुना तट के ताजमहल। कवि निरंकार देव सेवक के बारे में रामजी शरण का कहना था कि सेवक जी को साथ रखने के लोभ में मैने उन्हें वकालत कराई जबकि लोगो का कहना था कि मैने उन्हें कवि से वकील बना दिया और उन्होंने मुझे वकील से कवि बन दिया। रामजी शरण की पुस्तक ‘निर्झरणी’ कवि नाथू लाल अग्निहोत्री नम्र जी की प्रेरणा से ही पूरी हुई । निर्झरणी की भूमिका में रामजी शरण ने लिखा- प्रमुख उद्देश्य कविता का अपने को सुखी करना है और इससे किसी को भी शांति मिले तो यह उस कविता की विशेष सफलता है। कविता उपदेश के लिए नहीं लिखी जाती किंतु उसके अंतर्गत यदि कोई प्रयास रहित संदेश निहित हो तो क्या कहना। निरंकार देव सेवक ने निर्झरणी पुस्तक में सहयोगी की भूमिका निभाई। यह बात राम प्रकाश गोयल ने अपने एक आलेख में कही। राम प्रकाश गोयल की पुत्री ममता गोयल के अनुसार उनके पिता राम प्रकाश गोयल बताते थे कि 1951 में जब वकालत की डिग्री पास की। उसके बाद उनका एडवोकेट राम जी शरण के पास रोज जाना होता था। ममता गोयल जी भी अपने पिता के साथ ताऊ जी रामजी शरण के यहां अक्सर जाती थी। राम प्रकाश गोयल के अनुसार रामजी शरण सुबह का समय अपने मुकदमों की तैयारी में देते। शाम का समय कवि शायरों की महफ़िल के लिए होता था। उनके यहां श्रीमती ज्ञानवती जी, कवि होरी लाल शर्मा नीरव जी, नाथू लाल अग्निहोत्री नम्र जी, सतीश संतोषी, किशन लाल साकिब, किशन सरोज, अनवर चुगताई, वसीम बरेलवी जी अपनी रचनायें प्रस्तुत करते थे। कुछ कवि बताते हैं कि रामजी शरण जी बादशाह बाले अंदाज में बैठ कर आयोजक के रूप में सबकी खातिरदारी भी खूब कराते थे। किशन सरोज जी रामजी शरण जी से बहुत प्रभावित थे। उनका कहना था कि जांचे परखे कवि ही बाबू रामजी शरण की कवि गोष्ठी में अपनी रचनायें प्रस्तुत कर पाते थे। एटा में ज्वाला नारायण जी के धार्मिक माहौल वाले घर मे जन्मे रामजी शरण जी की प्रारम्भिक शिक्षा एटा में हुई। उनके पिता ज्वाला नारायण उर्दू फ़ारसी के जानकार थे। बाद में रामजी शरण की शिक्षा कानपुर एवम आगरा विश्व विद्यालय में हुई जहां उन्होंने प्रथम श्रेणी में इतिहास से एम ए एवम कानून की डिग्री ली। इसके बाद बदायूं में वकालत प्रारम्भ की जो किन्ही कारण से नहीं चली। 1940 से उनके संपर्क में आये निरंकार देव सेवक के अनुसार बाद में रामजी शरण अध्यापक बनने की चाह लिए बरेली आ गए। पर जब अध्यापक भी नही बन सके तो फिर बरेली में वकालत शुरू की और फौजदारी के सफल बकील में उनकी गिनती होने लगी। निरंकार देव सेवक ने प्रसिद्ध कवि सोहन लाल द्विर्वेदी को जब रामजी लाल के कविता लेखन की जानकारी दी तो द्विर्वेदी जी का कहना था फोजदरी के बकील का कविता लेखन से उन्हें सुखद अनुभूति हुई। 31 अगस्त 1984 को 77 वर्ष की आयु में रामजी शरण जी का निधन हुआ। उनके पुत्र जगदीश सरन उर्फ बच्चन भी एडवोकेट रहे जबकि 3 पुत्रियां अपने अपने ससुराल में है। निरंकार देव सेवक की पुत्रवधु श्रीमती पूनम सेवक का कहना है कि सेवक जी रामजी शरण को रिश्तेदार से अधिक अपना मित्र मानते थे। अध्यापक हरि शंकर सक्सेना कहते है कि कवि ज्ञानवती जी के कहने पर ही उन्होंने अपनी पत्रिका का नाम भी ‘निर्झरणी’ रखा। हरि शंकर जी कहते हैं कि श्रीमती ज्ञानवती जी कहती थी कि इससे रामजी शरण की याद कायम रहेगी।


स्वर्गीय राम जी शरण सक्सेना बाबूजी की धर्मपत्नी स्वर्गीय कमला देवी, के बारे में कवि आनंद गौतम का कहना है कि वह कमला देवी जी को आदर पूर्वक बुआ जी कहा करते थे, उनका स्वर्गीय रामजी शरण के परिवार से असली जुड़ाव तब शुरू हुआ जब श्रीमती कमला देवी जी ने संस्थापिका के रूप में वर्ष 1988 में ‘परिक्रमा’ संस्था बनाई । जिसमें आनंद गौतम को सचिव का भार सौंपा गया । बाबू रामजी शरण की स्मृति में साहित्यिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में विशेष उल्लेखनीय योगदान देने वाले विभूतियों को सम्मानित करने का निर्णय भी लिया गया था । इससे पूर्व स्वर्गीय रामजी शरण जी का स्मृति समारोह 20 मई 1985 से उनके घर पर होता रहा था। वर्ष 1987 में शहर की ही एक संस्था ‘संस्कृति’ ने इसका उत्तरदायित्व लिया और संजय कम्युनिटी हॉल, बरेली में एककार्यक्रम हुआ । वर्ष 1988 में परिक्रमा संस्था द्वारा सुप्रसिद्ध गीतकार स्वर्गीय भारत भूषण जी एवं सुप्रसिद्ध ग़ज़ल गायक खुशीद जी का अभिनंदन किया। इसी परंपरा का निर्वाह करते हुए वर्ष 1989 में सुप्रसिद्ध राष्ट्रीय चेतना के गीतकार स्वर्गीय डॉ. उर्मिलेश शंखधार एवं डॉ जे. एन. सारस्वत ( राष्ट्रपति पदक प्राप्त प्रधानाचार्य – एस. वी. इंटर कॉलेज) को कार्यक्रम में सम्मानित किया गया। वर्ष 1990 में बाबू रामजी शरण की स्मृति में हुए कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध शायर कृष्ण बिहारी ‘नूर’ एवं प्रगतिशील रचनाकार एवं कवि पत्रकार डॉ. वीरेन डंगवाल का अभिनंदन किया गया । यह शायद बाबू रामजी शरण की स्मृति का अंतिम कार्यक्रम था। कारण सिर्फ इतना था कि कमला देवी का स्वास्थ्य दिन प्रतिदिन गिरता जा रहा था तथा संस्था के ज्यादातर सदस्य इधर-उधर चले गए थे।
स्वर्गीय बाबू रामजी शरण जी के विषय में कवि आनंद गौतम ने एक कविता स्मृति समारोह के दिन लिखी थी जो काफी सराही भी गई।

कलम बरेली की से साभार निर्भय सक्सेना पत्रकार, बरेली मोबाइल 9411005249

https://youtu.be/3b-ZhIWxKU0
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