बदायूं। बिहार में करीब 19 हजार कारतूसों की बड़ी खेप पकड़े जाने के बाद अब इस तस्करी के तार उत्तर प्रदेश के बदायूं से जुड़ते नजर आ रहे हैं। मामले की जांच के सिलसिले में बिहार पुलिस की टीम ने बदायूं पहुंचकर सिविल लाइंस थाना क्षेत्र स्थित बदायूं गन हाउस पर छापेमारी की। बताया जा रहा है कि बिहार में गिरफ्तार किए गए तीन कथित कारतूस तस्करों से पूछताछ के दौरान मिले इनपुट के आधार पर पुलिस टीम बदायूं पहुंची है। छापेमारी के बाद स्थानीय स्तर पर भी इस मामले को लेकर हलचल तेज हो गई है।
भोजपुर में पकड़ी गई थी 19 हजार से अधिक कारतूसों की खेप
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, बिहार एसटीएफ और भोजपुर जिला पुलिस की संयुक्त टीम ने 2 नवंबर को भोजपुर जिले के कोईलवर थाना क्षेत्र में कुल्हड़िया टोल प्लाजा के पास कार्रवाई करते हुए तीन कथित अंतरराज्यीय तस्करों को गिरफ्तार किया था। उनके कब्जे से करीब 19 हजार से अधिक कारतूस, एक देसी पिस्तौल, पांच मोबाइल फोन और तस्करी में इस्तेमाल की जा रही गाड़ी बरामद की गई थी। शुरुआती रिपोर्टों में कारतूसों की संख्या करीब 19,200 बताई गई है।
मुजफ्फरपुर और सीवान के रहने वाले हैं गिरफ्तार आरोपी
रिपोर्टों के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में मुजफ्फरपुर के अहियापुर क्षेत्र के सारस कुमार और लल्टू कुमार तथा सीवान जिले के चंदन तिवारी शामिल हैं। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया कि कारतूसों की खेप उत्तर प्रदेश से बिहार लाई जा रही थी। इनकी आपूर्ति मुजफ्फरपुर, सुपौल, दरभंगा, सीवान और वैशाली समेत कई जिलों में किए जाने की आशंका जताई गई है।
बदायूं से सप्लाई के इनपुट पर जांच का दायरा बढ़ा
बताया जा रहा है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान बदायूं से कारतूसों की सप्लाई से जुड़े इनपुट मिले। इसी आधार पर बिहार पुलिस की टीम बदायूं पहुंची और सिविल लाइंस क्षेत्र स्थित बदायूं गन हाउस पर छापेमारी की। पुलिस की जांच का मुख्य बिंदु यह पता लगाना है कि कारतूस कहां से खरीदे गए, उनकी आपूर्ति में किन लोगों की भूमिका रही और इस नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं।
कारतूस तस्करी के अंतरराज्यीय नेटवर्क की तलाश
बिहार एसटीएफ और स्थानीय पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के साथ बरामद मोबाइल फोन तथा अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है। जांच एजेंसियां कारतूसों के स्रोत से लेकर उनके संभावित खरीदारों तक पूरी सप्लाई चेन का पता लगाने में जुटी हैं। बदायूं में हुई छापेमारी के बाद अब जांच की दिशा स्थानीय स्तर पर भी केंद्रित हो गई है।


























































































