नई दिल्ली:
भारतीय नौसेना की युद्ध क्षमता और समुद्री सुरक्षा प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित रक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) ने लगभग 40,000 करोड़ रुपये की विशाल लागत वाले एक रक्षा सौदे को हरी झंडी दे दी है। इस महाप्रोजेक्ट के तहत भारतीय नौसेना के लिए 8 नए, अत्याधुनिक और शक्तिशाली युद्धपोतों (वारशिप) का निर्माण किया जाएगा।
‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा आत्मनिर्भरता को मिलेगी रफ्तार
यह रक्षा सौदा पूरी तरह से सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की नीति पर आधारित है। इन सभी 8 स्वदेशी युद्धपोतों का निर्माण देश के ही शीर्ष नौसेना शिपयार्डों में किया जाएगा।
इस निर्णय से न केवल देश की सीमावर्ती सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि घरेलू रक्षा निर्माण क्षेत्र (Defense Manufacturing) और शिपबिल्डिंग इंडस्ट्री को भी भारी बढ़ावा मिलेगा। अनुमान जताया जा रहा है कि इस परियोजना से रक्षा क्षेत्र से जुड़े कई एमएसएमई (MSMEs) और सप्लाई चेन उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
अत्याधुनिक तकनीक और मारक क्षमता से लैस होंगे युद्धपोत
नौसेना को मिलने वाले ये नए युद्धपोत ‘नेक्स्ट-जनरेशन’ टेक्नोलॉजी से लैस होंगे। इनमें निम्नलिखित प्रमुख विशेषताएं शामिल होंगी:
- स्टेल्थ टेक्नोलॉजी: दुश्मन के रडार की पकड़ में आसानी से न आने वाले विशेष डिजाइन और कोटिंग।
- उन्नत मिसाइल व रडार सिस्टम: लंबी दूरी तक सटीक निशाना साधने वाली एंटी-शिप व एंटी-एयर मिसाइलें और सेंसर।
- पनडुब्बी रोधी क्षमता: समुद्र की गहराइयों में छिपी दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने की क्षमता।
- स्वदेशी उपकरण: युद्धपोत के कई प्रमुख पुर्जे, हथियार और संचार प्रणालियाँ स्वदेशी कंपनियों द्वारा विकसित की जाएंगी।
हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में बढ़ेगा भारत का वर्चस्व
हाल के वर्षों में हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भू-राजनीतिक और रणनीतिक हलचलें काफी तेज हुई हैं। समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा, समुद्री डकैती पर लगाम और किसी भी बाहरी चुनौती का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारतीय नौसेना का आधुनिक होना अत्यंत आवश्यक है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन 8 नए पोतों के नौसेना बेड़े में शामिल होने के बाद भारत की समुद्री निगरानी, गश्त और आक्रामक क्षमता में कई गुना वृद्धि होगी। यह कदम भारत को हिंद महासागर क्षेत्र में एक ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ (Net Security Provider) के रूप में और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।
संक्षेप में: यह 40,000 करोड़ रुपये का सौदा भारतीय नौसेना को आधुनिक युग की चुनौतियों से निपटने में पूरी तरह सक्षम बनाएगा और भारत को रक्षा निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का एक मजबूत माध्यम साबित होगा।


























































































