बदायूं। श्री रामलीला महोत्सव के अंतर्गत बुधवार को राष्ट्रीय गीतकार डॉ. उर्मिलेश को समर्पित रामलीला मंच पर अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। देश के ख्यातिप्राप्त कवियों ने हास्य, व्यंग्य, श्रृंगार और वीर रस की रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कवियों की सशक्त प्रस्तुतियों पर रामलीला मंच देर रात तक तालियों और ठहाकों से गूंजता रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि भाजपा जिलाध्यक्ष राजीव गुप्ता, आमंत्रित कवियों और आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। समिति की ओर से अतिथियों और कवियों का सम्मान किया गया। इसके बाद शुरू हुए काव्यपाठ में साहित्य, संस्कृति, सामाजिक चेतना, राष्ट्रप्रेम और मानवीय संवेदनाओं की विविध छवियां देखने को मिलीं। प्रख्यात गीतकार डॉ. उर्मिलेश के गीतों की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। श्रोताओं की मांग पर उन्होंने अपने अनेक गीत सुनाए। उनकी पंक्तियां “पतझर के रास्तों पर मैं बहार बांटता हूं, नफरत के दौर में भी मैं प्यार बांटता हूं” ने प्रेम, सद्भाव और सकारात्मकता का संदेश दिया। कानपुर के हास्य कवि हेमंत पांडेय ने अपनी चुटीली रचनाओं से खूब हंसाया। उनकी पंक्तियां “फूल तुझे देने के लिए निकले थे जानेमन, पर यूपी पुलिस ने उसे रास्ते में ले लिया” सुनकर श्रोता ठहाके लगाने लगे। लखनऊ की कवयित्री शशि श्रेया ने अपनी मधुर आवाज और श्रृंगार रस की प्रस्तुति से वातावरण को भावपूर्ण बना दिया। उन्होंने सुनाया, “तोल ले मोतियों से कोई सुंदरी, तुम मेरे ही रहोगे ये वादा करो।” उनकी प्रस्तुति को श्रोताओं की सराहना मिली। लखनऊ के ओजस्वी कवि अभय निर्भीक ने राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं में जोश भर दिया। उनकी पंक्तियां “अपनी धरती पर षड्यंत्रियों की दाल नहीं गलने देंगे, भारत को हम ढाका या नेपाल नहीं बनने देंगे” पर मंच तालियों से गूंज उठा। डॉ. सोनरूपा विशाल ने प्रेम की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा, “जो मिला ही नहीं वो खोता क्या, कोई बंजर जमीन पे बोता क्या, प्यार है तो है ये जहां कायम, प्यार होता नहीं तो होता क्या।” उनकी भावपूर्ण प्रस्तुति ने श्रोताओं को प्रेम और मानवीय संवेदनाओं का संदेश दिया। कवि सम्मेलन का संचालन कर रहे कोटा के प्रख्यात हास्य कवि आदित्य जैन ने अपनी प्रभावशाली शैली में श्रोताओं को बांधे रखा। उन्होंने राम के प्रति आस्था और सम्मान को व्यक्त करते हुए कहा, “ये वक्त जागरण का है, आराम का नहीं, जिस दिल में भी सम्मान तेरे नाम का नहीं, उन लोगों के इस देश में रहने से लाभ क्या, जो राम का नहीं वो किसी काम का नहीं।” वहीं डॉ. अक्षत अशेष ने अमन और इंसानियत की तलाश का संदेश देते हुए सुनाया, “प्यार का, अमन का उनवान तलाशा जाए, अब तो हर मोड़ पे इंसान तलाशा जाए।” उनकी रचना ने सामाजिक सद्भाव और मानवीय मूल्यों की आवश्यकता को रेखांकित किया। कवि सम्मेलन में हास्य और व्यंग्य के माध्यम से सामाजिक विसंगतियों पर प्रहार किया गया, तो श्रृंगार रस की रचनाओं ने प्रेम की कोमल भावनाओं को अभिव्यक्ति दी। वीर रस की कविताओं ने राष्ट्रप्रेम और उत्साह का संचार किया। देर रात तक चले इस आयोजन के माध्यम से हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा और काव्य की विभिन्न विधाओं को जनसामान्य तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम के दौरान श्री रामलीला महोत्सव समिति के सांस्कृतिक मंत्री एवं सह सचिव अमर वैश्य ने कहा कि समिति धार्मिक आयोजनों के साथ साहित्य, कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए भी निरंतर प्रयासरत है। समिति अध्यक्ष अरविंद कांत ने कहा कि महोत्सव का उद्देश्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ साहित्यिक गतिविधियों को भी व्यापक मंच प्रदान करना है। उन्होंने बताया कि कवि सम्मेलन को अब प्रतिवर्ष स्थायी रूप से आयोजित किया जाएगा।
इस अवसर पर उपाध्यक्ष मुनीश अग्रवाल, मंत्री रविंद्र कुमार (रवि), सदस्य शैलेंद्र प्रकाश गुप्ता, अमर वैश्य, अनुपम वैश्य, गौरव गुप्ता, नितिन गुप्ता, अनूप रस्तोगी, रविंद्र मोहन सक्सेना, विशाल रस्तोगी, नरेश शंखधार, सुमित मिश्रा, प्रतीश गुप्ता सहित समिति के अन्य सदस्य और साहित्यप्रेमी मौजूद रहे।


























































































