बरेली। श्री त्रिवटीनाथ मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस श्रीमद्भागवताचार्य पंडित माधव उपाध्याय ने भगवान नरसिंह, वामन और मत्स्य अवतार के प्रसंगों का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान सदैव अपने भक्तों के विश्वास और प्रेम की रक्षा करते हैं। भक्त प्रहलाद की अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान नरसिंह ने खंभे से प्रकट होकर हिरण्यकश्यप का वध किया और प्रहलाद की रक्षा की। भगवान का क्रोध अपने भक्त के प्रेम और स्तुति से शांत हो गया। उन्होंने प्रहलाद को गोद में बैठाकर स्नेह भी किया। इससे स्पष्ट होता है कि भगवान अपने भक्तों के निश्छल प्रेम और समर्पण के आगे मानो बेबस हो जाते हैं। कथाव्यास ने गजेंद्र मोक्ष का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य परमात्मा का स्मरण करना है। लोग सामान्य दिनों में भगवान को भूल जाते हैं और संकट आने पर उन्हें याद करते हैं। गजेंद्र ने ग्राह के चंगुल में फंसने पर भगवान श्रीहरि को पुकारा तो वे गरुड़ पर सवार होकर उसकी रक्षा के लिए पहुंचे। भगवान के वामन अवतार का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि दैत्यराज बलि ने तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया था। तब भगवान वामन रूप में उनके पास पहुंचे और तीन पग भूमि मांगकर तीनों लोक वापस ले लिए। उन्होंने कहा कि मनुष्य को प्रकृति पर अपना अधिकार समझने के बजाय अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने भगवान के मत्स्य अवतार का प्रसंग भी सुनाया। कथाव्यास ने सूर्यवंश और चंद्रवंश का महत्व बताते हुए कहा कि सूर्यवंश में भगवान श्रीराम और चंद्रवंश में भगवान श्रीकृष्ण का अवतार हुआ। श्रीराम का चरित्र मर्यादा और आदर्श का प्रतीक है, जबकि श्रीकृष्ण का चरित्र अनेक लीलाओं से परिपूर्ण है। उन्होंने श्रीराम और श्रीकृष्ण के जीवन प्रसंगों की तुलना करते हुए भक्तों को धर्म और भक्ति का संदेश दिया। कथा के दौरान श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। अंत में श्रीमद्भागवत जी की आरती की गई और प्रसाद वितरित किया गया। आयोजन में मंदिर कमेटी के प्रताप चंद्र सेठ, मीडिया प्रभारी संजीव औतार अग्रवाल और सुभाष मेहरा का विशेष सहयोग रहा।
भक्तों के निश्छल प्रेम के आगे भगवान भी हो जाते हैं बेबस: पंडित माधव उपाध्याय

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