बरेली। बाबा त्रिवटीनाथ मंदिर सेवा समिति की ओर से मंदिर के श्री रामालय में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास पंडित माधव उपाध्याय ने श्रद्धालुओं को भक्ति, ज्ञान, कर्म और सदाचार का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि भगवान केवल भाव के भूखे हैं। सच्चे मन से की गई भक्ति से ही परमात्मा की कृपा प्राप्त होती है। कथा व्यास ने कहा कि व्यक्ति को सबसे पहले आसन पर नियंत्रण करना चाहिए, फिर श्वास को साधना और अच्छे लोगों का संग करना चाहिए। जब मनुष्य अपनी इंद्रियों को वश में कर लेता है, तब वह स्वयं को भगवान के चरणों में समर्पित करने योग्य बनता है और मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने कहा कि सभी देवी-देवता भगवान नारायण के ही स्वरूप हैं। जिस प्रकार वृक्ष की जड़ एक होती है, लेकिन उसकी शाखाएं और पत्ते अनेक होते हैं, उसी प्रकार समस्त सृष्टि के मूल में भगवान नारायण हैं। इसलिए सभी का आदर करना चाहिए। कथा में चार श्लोकी भागवत का वर्णन करते हुए उन्होंने सृष्टि की उत्पत्ति और भगवान नारायण की महिमा समझाई। उन्होंने कहा कि भगवान की माया के कारण असत्य भी सत्य जैसा दिखाई देने लगता है। भागवत में सर्ग, विसर्ग, स्थान और पोषण सहित दस लक्षण बताए गए हैं। कथा व्यास ने सुदामा, कुब्जा और ध्रुव के प्रसंगों के माध्यम से समझाया कि भगवान धन, सौंदर्य और आयु नहीं, बल्कि भक्त का भाव देखते हैं। उन्होंने बताया कि भगवान ने दुर्योधन के छप्पन भोग छोड़कर विदुर के घर प्रेमपूर्वक सादा भोजन ग्रहण किया। इसके साथ ही माता सती, भगवान शिव और दक्ष यज्ञ का प्रसंग सुनाते हुए अहंकार त्यागने तथा दूसरों का सम्मान करने की सीख दी।
मनु-शतरूपा के प्रसंग में उन्होंने मानवता और समानता का संदेश दिया। वहीं भगवान कपिल और माता देवहूति के संवाद के माध्यम से ज्ञान, भक्ति और कर्म मार्ग का महत्व बताते हुए कहा कि लक्ष्य प्राप्त करने के लिए किसी न किसी मार्ग पर निरंतर चलना आवश्यक है।
कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने आरती की और प्रसाद वितरित किया गया। आयोजन में मंदिर कमेटी के प्रताप चंद्र सेठ, मीडिया प्रभारी संजीव औतार अग्रवाल और सुभाष मेहरा का विशेष सहयोग रहा।
भगवान केवल भाव के भूखे हैं, भक्ति से ही मिलता है परमात्मा का सानिध्य

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