बरेली। शहर के प्राचीन एवं प्रसिद्ध बाबा त्रिवटीनाथ मंदिर में सोमवार को श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। वृंदावन से पधारे भागवताचार्य पंडित माधव उपाध्याय का मंदिर कमेटी के प्रताप चंद्र सेठ एवं मीडिया प्रभारी संजीव औतार अग्रवाल ने माल्यार्पण कर स्वागत एवं अभिनंदन किया। कथा के प्रथम दिन कथा व्यास ने श्रीमद्भागवत महापुराण की महिमा का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति और सदाचार के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। कथा का शुभारंभ मंगलाचरण के साथ करते हुए पं. माधव उपाध्याय ने कहा कि भगवान सच्चिदानंद स्वरूप हैं। परमात्मा के सत्, चित् और आनंदमय स्वरूप का स्मरण करने से मनुष्य को आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है। उन्होंने बताया कि दैहिक, दैविक और भौतिक कष्टों से मुक्ति पाने के लिए भगवान श्रीराधा-कृष्ण का स्मरण करना चाहिए। श्रीमद्भागवत को वेद रूपी वृक्ष का पका हुआ, रस से परिपूर्ण फल बताते हुए उन्होंने कहा कि इसमें भक्ति, ज्ञान और कल्याण का सार समाहित है।
कथा व्यास ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण मनुष्य को दुर्गुणों से दूर कर सद्गुणों की ओर प्रेरित करता है। जिस प्रकार सिंह की गर्जना से वन के पशु-पक्षी भयभीत हो जाते हैं और गंगा स्नान को पवित्रता का प्रतीक माना गया है, उसी प्रकार भागवत कथा का श्रवण व्यक्ति के अंतर्मन को शुद्ध कर उसे प्रभु भक्ति के मार्ग पर अग्रसर करता है। इसके लिए मनुष्य का भाव परमात्मा के प्रति निष्कपट और समर्पित होना आवश्यक है। पं. माधव उपाध्याय ने नैमिषारण्य में सूत जी द्वारा श्रीमद्भागवत महापुराण की महिमा का वर्णन किए जाने का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भागवत कथा के श्रवण से गंगा स्नान, तुलसी सेवा और तीर्थवास के समान पुण्य फल प्राप्त होने की मान्यता है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत की महिमा इतनी व्यापक है कि इसके श्रवण से पापमय जीवन व्यतीत करने वाले व्यक्ति के उद्धार का मार्ग भी प्रशस्त हो सकता है।
कथा के दौरान धुंधकारी और गोकर्ण का प्रसंग विशेष आकर्षण रहा। कथा व्यास ने बताया कि आत्मदेव और धुंधली के पुत्र गोकर्ण भगवान के स्मरण तथा वेद-पुराणों के अध्ययन में लीन रहते थे, जबकि धुंधकारी अनैतिक कार्यों में लिप्त रहता था। मृत्यु के बाद धुंधकारी को प्रेतयोनि में कष्ट भोगना पड़ा। इसके बाद भाई गोकर्ण ने श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराया, जिससे धुंधकारी का उद्धार हुआ। इस प्रसंग के माध्यम से कथा व्यास ने समझाया कि सच्ची भक्ति, सत्संग और भागवत श्रवण व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की प्रेरणा देते हैं।
उन्होंने कहा कि ब्रह्माजी के अनुसार भगवान के स्वरूप और उनकी महिमा को समझने के लिए श्रीमद्भागवत महापुराण का विशेष महत्व है। इसके श्रवण से मनुष्य को सद्गति और आध्यात्मिक कल्याण की प्रेरणा मिलती है।
कथा के समापन पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने श्रीमद्भागवत महापुराण की आरती की। इसके बाद प्रसाद वितरण किया गया। मंदिर कमेटी के मीडिया प्रभारी संजीव औतार अग्रवाल ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा 12 अक्टूबर से 18 अक्टूबर तक प्रतिदिन शाम पांच बजे से सात बजे तक आयोजित होगी। उन्होंने नवरात्रि के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं से अमृतमयी भागवत कथा का श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त करने की अपील की।
कार्यक्रम में मंदिर कमेटी के प्रताप चंद्र सेठ, मीडिया प्रभारी संजीव औतार अग्रवाल और सुभाष मेहरा का विशेष सहयोग रहा।
श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से होता है पापों का शमन: पं. माधव उपाध्याय

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