बरेली। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से रामलीला ग्राउंड, हार्टमैन कॉलेज रोड में आयोजित सात दिवसीय भगवान शिव कथामृत के दूसरे दिन समुद्र मंथन प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा का आयोजन प्रतिदिन शाम 3:30 से 7:30 बजे तक किया जा रहा है। कथा से पूर्व सुबह योगाचार्य अमर प्रकाश शर्मा और सीमा वर्मा ने श्रद्धालुओं को योगाभ्यास कराया। कथा व्यास एवं दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य डॉ. सर्वेश्वर ने समुद्र मंथन प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब समुद्र मंथन से हलाहल कालकूट विष निकला, तब सृष्टि के कल्याण के लिए भगवान शिव ने उसे अपने कंठ में धारण कर लिया। इसी कारण उनका नाम नीलकंठ पड़ा। उन्होंने कहा कि भगवान शिव का नीलकंठ स्वरूप मनुष्य को त्याग और सहनशीलता का गुण अपनाने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि शिवभक्त होने के नाते प्रत्येक व्यक्ति को निजी स्वार्थों से ऊपर उठकर समाज और जगत के कल्याण में योगदान देना चाहिए। जीवन में ‘मैं’ से ‘हम’ तक का सफर तय करना ही शिव तत्व को समझना है। उन्होंने पशु-पक्षियों के प्रति दया और करुणा का भाव रखने का आह्वान करते हुए कहा कि भगवान शिव का एक नाम पशुपतिनाथ भी है। ऐसे में प्राणीमात्र के प्रति संवेदना रखना ही सच्ची शिवभक्ति है। डॉ. सर्वेश्वर ने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में दया, प्रेम, त्याग और करुणा जैसे गुण विकसित करने चाहिए। उन्होंने कहा कि ब्रह्मज्ञान के माध्यम से ही मनुष्य अपने भीतर नीलकंठ स्वरूप का अनुभव कर सकता है।
इस अवसर पर कथा पंडाल में महाशिवरात्रि महोत्सव भी धूमधाम से मनाया गया। श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन और नृत्य के साथ उत्सव का आनंद लिया। रोहिलखंड मेडिकल कॉलेज की ओर से स्वास्थ्य शिविर भी लगाया गया, जिसमें लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गईं।
कार्यक्रम में निशांत चौहान, धर्म प्रकाश, लखन सिंह गंगवार, राम गोपाल मिश्रा, मुदित मिश्रा, खेमपाल साहू, राजेश मिश्रा, निकिता शुक्ला, सुमित गंगवार, भूप सिंह, कृष्णवीर गंगवार, हरकेश सिंह, डॉ. बृजेश सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे। मीडिया प्रभारी हरीश भट्ट ने व्यवस्थाओं में सहयोग किया।
नीलकंठ स्वरूप त्याग और सहनशीलता की देता है प्रेरणा

6.4K views

























































































