नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश समेत देश के कई हिस्सों में सितंबर के अंतिम दिनों में बारिश ने एक बार फिर जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। उत्तर प्रदेश में पिछले करीब 48 घंटों से जारी भारी बारिश और आंधी-तूफान के कारण कम से कम 57 लोगों की मौत और पांच लोगों के घायल होने की रिपोर्ट सामने आई है। राज्य के 63 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। राहत आयुक्त के अनुसार पिछले 24 घंटे में प्रदेश में सामान्य से करीब 19 गुना अधिक बारिश हुई। भारी बारिश और तेज हवाओं से खड़ी फसलों के साथ मकानों को भी नुकसान पहुंचा है।
देश के स्तर पर भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। हिन्दुस्तान टाइम्स की 27 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार पूर्वी और मध्य भारत में पिछले 48 घंटों में भारी बारिश और बाढ़ से कम से कम 65 लोगों की मौत हुई है। कई राज्यों में फसल और संपत्ति को नुकसान पहुंचा है तथा हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। ओडिशा में ही 73 हजार से अधिक लोग प्रभावित हुए और 40 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।उत्तर प्रदेश में गुरुवार रात से शुरू हुआ बारिश का दौर शनिवार और रविवार तक जारी है। लखनऊ में शनिवार सुबह तक 24 घंटे में 135.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि हनुमान सेतु वेधशाला में 201.2 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई। बारिश के कारण कई शहरों में सड़कें जलमग्न हो गईं और आवागमन प्रभावित हुआ।
राहत आयुक्त कार्यालय के अनुसार पिछले 48 घंटे में बारिश और आंधी-तूफान से 117 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना है। बांदा में सबसे अधिक 32 मकानों के नुकसान की रिपोर्ट है। जालौन में 21, हरदोई में 14 तथा औरैया और पीलीभीत में सात-सात मकानों को नुकसान पहुंचा है। खड़ी खरीफ फसलों को भी व्यापक नुकसान की रिपोर्ट सामने आई है।
बारिश से हुई जनहानि की जिलावार रिपोर्ट में अमेठी, बहराइच, बांदा, बाराबंकी, बस्ती, फतेहपुर, हमीरपुर, हरदोई और कानपुर नगर में एक-एक, अयोध्या में दो तथा लखीमपुर खीरी में चार मौतें शामिल हैं।
आठ जिलों में रेड अलर्ट, पश्चिमी यूपी पर विशेष नजर
रविवार 27 सितंबर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। बरेली, रामपुर, पीलीभीत और शाहजहांपुर समेत कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है। श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, रामपुर, बरेली, पीलीभीत और शाहजहांपुर समेत आठ जिलों के लिए रेड अलर्ट की जानकारी सामने आई है।
इसके अलावा लखनऊ, बस्ती, गोंडा, सिद्धार्थनगर और बलरामपुर समेत कई जिलों में भी भारी बारिश और गरज-चमक की चेतावनी है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान में बदायूं समेत पश्चिमी और मध्य यूपी के कई जिलों में भी बारिश की संभावना बताई गई है।
लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव और नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने की आशंका है। उन्नाव में गंगा एक्सप्रेसवे पर भी जलभराव के कारण यातायात प्रभावित हुआ।
उत्तराखंड में फ्लैश फ्लड का खतरा
उत्तराखंड में भी भारी बारिश का दौर जारी है। 26 और 27 सितंबर के लिए कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई थी। देहरादून, टिहरी, हरिद्वार और पौड़ी समेत कई क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। खराब मौसम के चलते चारधाम यात्रा को भी 27 सितंबर तक स्थगित किया गया है।
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण अचानक बाढ़, भूस्खलन और नदी-नालों में तेज बहाव का खतरा बना हुआ है। हिमाचल प्रदेश में भी कई जिलों में बारिश को लेकर चेतावनी जारी है।
बारिश ने बदला तापमान, 28 सितंबर से राहत के संकेत
लगातार बारिश के कारण उत्तर प्रदेश के अनेक हिस्सों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान में 2 से 9 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की गई है। बारिश का यह दौर सितंबर के अंतिम सप्ताह में तापमान को सामान्य से नीचे ले गया है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार रविवार 27 सितंबर को पश्चिमी यूपी में भारी से बहुत भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। इसके बाद 28 सितंबर से बारिश की गतिविधियों में कमी आने के संकेत हैं। हालांकि स्थानीय स्तर पर हल्की बारिश और गरज-चमक की संभावना बनी रह सकती है।बदायूं और पश्चिमी यूपी के अन्य जिलों में भी 27 सितंबर को मौसम खराब रहने के बाद अगले दिनों में तापमान धीरे-धीरे बढ़ने की संभावना है। इसलिए बारिश से तत्काल राहत मिलने के बावजूद जलभराव और खेतों में जमा पानी की समस्या कुछ समय तक बनी रह सकती है।फसल और मकानों के नुकसान का आकलन जारी
बारिश के कारण ग्रामीण इलाकों में धान समेत खरीफ की फसलों को नुकसान पहुंचा है। खेतों में पानी भरने से खड़ी फसल प्रभावित हुई है और आने वाली रबी की बुवाई में भी देरी की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन कराया जा रहा है।
लगातार बारिश के बीच प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने, जलभराव वाले रास्तों और नदी-नालों के किनारे जाने से बचने की अपील की है। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और अचानक तेज बहाव वाले स्थानों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है।
फिलहाल 27 सितंबर भारी बारिश और सतर्कता का दिन है। 28 सितंबर से बारिश में कमी आने के संकेत जरूर हैं, लेकिन पहले से जलभराव वाले इलाकों में खतरा तत्काल समाप्त नहीं माना जा सकता।
भारी बारिश से यूपी में 57 मौतें, 117 मकान क्षतिग्रस्त; 8 जिलों में रेड अलर्ट, पश्चिमी यूपी में बाढ़ का खतरा

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