बरेली। सोमवार को श्रीमद् भागवत कथा में कथा व्यास मुमुक्षु कृष्ण दद्दा जी ने मुख्य रूप से चतुःश्लोकी भागवत, जड़भरत चरित्र, पुरंजनोपाख्यान और कपिल-देवहूति संवाद जैसे अध्यात्मिक प्रसंगों का श्रवण कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
कथा व्यास ने सर्वप्रथम चतुःश्लोकी भागवत की महत्ता समझाते हुए कहा कि भगवान नारायण ने ब्रह्मा जी को केवल चार श्लोकों में संपूर्ण भागवत का सार प्रदान किया था। इन चार श्लोकों में सृष्टि का सत्य, ईश्वर की माया और जीव के जीवन का मूल उद्देश्य समाहित है। जब मनुष्य संसार के प्रपंचों को छोड़कर ईश्वर के वास्तविक स्वरूप को जान लेता है, तभी उसे अद्वैत ज्ञान की प्राप्ति होती है।
तदनंतर, जड़भरत चरित्र का मार्मिक प्रसंग सुनाते हुए व्यास जी ने बताया कि किस प्रकार राजा भरत को एक हिरण के बच्चे में अत्यधिक आसक्ति के कारण पुनर्जन्म लेना पड़ा। महाराज ने समझाया कि अति-आसक्ति ही जीव के बंधन का कारण है। जड़भरत जी के जीवन से हमें यह सीख मिलती है कि बाहर से भले ही हम लोक-व्यवहार के लिए उदासीन रहें, किंतु भीतर से हमारी चेतना सदैव प्रभु-भक्ति में लीन रहनी चाहिए।
कथा के अगले क्रम में पुरंजनोपाख्यान (पुरंजन का रूपक) के माध्यम से देह और आत्मा के संबंध को उजागर किया गया। व्यास जी ने बताया कि यह नवद्वार का शरीर एक नगर (पुर) के समान है और जीवात्मा इसकी राजा है। जब जीव मायावी बुद्धि के वशीभूत होकर विषयों में भटकता है, तब वह दुखों को प्राप्त होता है। इस रूपक कथा ने उपस्थित श्रोताओं को आत्म-निरीक्षण करने पर विवश कर दिया।
कथा के अंतिम चरण में भगवान विष्णु के कलावतार सांख्य योग के प्रवर्तक भगवान कपिल और माता देवहूति के संवाद का दिव्य वर्णन हुआ। भगवान कपिल ने अपनी माता को सांख्य दर्शन और भक्ति योग का उपदेश देते हुए कहा कि केवल निष्काम भक्ति और ज्ञान के द्वारा ही मनुष्य जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो सकता है। माता देवहूति ने इस ज्ञान को आत्मसात कर परम पद प्राप्त किया।आज की आरती प्रसाद के यजमान आलोक प्रधान ,सीमा प्रधान रहे, आज श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन प्रमुख रूप से कायस्थ सेना कल्याण परिवार रजि० बरेली के डॉ नितिन सक्सेना,रविन्द्र नाथ श्रीवास्तव,आलोक सक्सेना,आलोक कुमार(जिलाध्यक्ष),आलोक वर्मा,कर्नल ऐन के त्रिपाठी,डॉ सोनिया सक्सेना, प्रीति सक्सेना,सुशील सिंह, मयंक श्रीवास्तव,आर्यन प्रधान ,वृद्धाश्रम के संचालक एम के यादव,कांता गंगवार, रचना चौहान के साथ साथ वृद्धाश्रम के सभी वृद्ध भक्तजनों ने भाग लिया।
भागवत महापुराण के परम गूढ़ और प्रेरणादायी प्रसंगों का ओजस्वी वर्णन

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