बरेली। एसआरएमएस रिद्धिमा – ए सेंटर ऑफ परफॉर्मिंग एंड फाइन आर्ट्स में आयोजित तीन दिवसीय ‘सुर साधना’ शास्त्रीय एवं उप-शास्त्रीय गायन कार्यशाला का सोमवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ। प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका एवं गुरु आस्था गोस्वामी के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यशाला में 47 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और संगीत की विभिन्न बारीकियों का प्रशिक्षण प्राप्त किया। कार्यशाला के प्रथम दिन प्रतिभागियों को शास्त्रीय संगीत की मूल अवधारणाओं से परिचित कराया गया। उन्हें शुद्ध स्वरों की सरगम, विभिन्न अलंकार, तीनताल की संरचना एवं उसकी बारीकियों का अभ्यास कराया गया। इसके साथ ही राग बिहाग का परिचय देते हुए उसकी विशेषताओं और गायन शैली को समझाया गया। राग बिहाग में प्रस्तुत ‘दुर्गा महारानी’ बंदिश के माध्यम से प्रतिभागियों ने राग के भाव और प्रस्तुति की विधि को जाना। दूसरे दिन कार्यशाला में प्रतिभागियों को उप-शास्त्रीय संगीत की प्रसिद्ध शैली ‘कजरी’ से परिचित कराया गया। गुरु आस्था गोस्वामी ने ‘बरसन लागी बदरिया’ कजरी के माध्यम से इस शैली की विशेषताओं, भाव, लय और गायन तकनीक को विस्तार से समझाया। प्रतिभागियों ने कजरी के स्वरों और भावों का अभ्यास करते हुए इस विधा की सुंदरता को आत्मसात किया। कार्यशाला के अंतिम दिन प्रतिभागियों ने पहले दो दिनों में सीखी गई रचनाओं और तकनीकों का अभ्यास कर अपनी प्रस्तुतियां दीं। प्रतिभागियों ने राग बिहाग की बंदिश ‘दुर्गा महारानी’ और कजरी ‘बरसन लागी बदरिया’ सहित सीखी गई विधाओं को आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुतियों ने संगीत के प्रति उनकी रुचि, समर्पण और सीखने की भावना को दर्शाया। समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों को सफल सहभागिता के लिए प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। तीन दिवसीय इस कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागियों को भारतीय शास्त्रीय एवं उप-शास्त्रीय संगीत की गहन समझ विकसित करने और अपनी गायन प्रतिभा को निखारने का अवसर प्राप्त हुआ। इस अवसर पर एसआरएमएस ट्रस्ट संस्थापक एवं चेयरमैन देव मूर्ति , डा. प्रभाकर गुप्ता, डा. अनुज कुमार, डा. रीता शर्मा उपस्थित रहे।
तीन दिवसीय ‘सुर साधना’ गायन कार्यशाला का समापन

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