बरेली। किला स्थित मोहल्ला फूटा दरवाज़ा में चल रहे उर्से गौसिया के दूसरे रोज़ की शुरुआत बाद नमाज़-ए-फ़ज्र कुरआन ख़्वानी के साथ हुई। दिनभर अल-सय्यद मोहियुद्दीन अबू मुहम्मद अब्दुल क़ादिर अल-जीलानी अल-हसनी वल-हुसैनी गौसे पाक के अक़ीदतमंदों की ज़ियारत का सिलसिला जारी रहा। ज़ायरीन ने मन्नतें-मुरादें मांगीं और मुल्क में अमन-ओ-अमान के साथ-साथ ख़ास तौर पर मरीज़ों की शिफ़ा के लिए दुआएं की गईं।झंडा शरीफ़ कमेटी के सचिव फ़राज़ मियाँ ने बताया कि हज़रत गौसे पाक का झंडा अमन और भाईचारे की पहचान है, जहाँ सभी धर्मों के लोग अक़ीदत के साथ हाज़िरी देकर दिली मुरादें पाते हैं। रात के कार्यक्रम में शहर के प्रसिद्ध डॉ. अनीस बेग, मेडिकल क्षेत्र से शान अहमद रज़ा, हज-उमराह टूर संचालक मो. आसिम हुसैन क़ादरी की दस्तारबंदी कर उन्हें सम्मानित किया गया।इसके उपरांत एक शानदार मुशायरे का आयोजन हुआ। मुशायरे की सदारत असरार नसीम ने की, जबकि निज़ामत के शायर बिलाल राज़ ने अंजाम दिए। शायरों ने सरकारे गौस-ए-आज़म की बारगाह में अपने बेहतरीन कलाम पेश कर समां बांध दिया।
मुशायरे की सदारत करते हुए असरार नसीमी ने अपने कलाम में कहा कि आक़ा के गुलामों की ज़ुबानों मे असर है
वो शाम को कह दें कि सहर है, तो सहर है।।
निज़ामत करते हुए बिलाल राज़ कहा कि हिक़ारत से न देखो ए अमीरो ! उनके मंगतो को,
हुकूमत बख़्श देते हैं गदा-ए-मुस्तफ़ा बेशक।।
शायर अज़हान वारसी ने पढ़ा कहे ये ज़माना गदा मुझ को तेरा
ये है आरज़ू-ए -दिली ग़ौसे आज़म।।
शायर सलमान आरिफ़ ने पढ़ा
नज़ारा अहले महशर देखिंगे जब क़ादरीयों को
जहन्नम से बचालेगी अक़ीदत गौसे आज़म की।।
शायर राहिल बरेलवी ने पढ़ा..
खुशी रहमत वफा बरकत मोहब्बत गौसे आजम की
मेरे घर में ये सब कुछ है बदौलत गौसे आजम की।।
शायर दुलारे फारूकी ,शायरअज़हान वारसी आदि ने अपने अपने कलाम पेश किये।
वली क्या, कुतुब क्या, वो हर सर के ताज हैं,
ग़ौस-ए-आज़म के दर पे सँवरे सबके काज हैं।
जिस सम्त भी उठी है करम की निगाह उनकी,
उस सम्त खिल उठे हैं गुलशन भी, बयाबाँ भी।
दस्तगीर हैं वो, हर बेबस का थामते हैं हाथ,
मुश्किल में जो पुकारे, वो रहते हैं उसके साथ।
सय्यद हैं, हसनैन के चश्म-ओ-चिराग़ हैं,
आशिक़ों के दिलों का वो ही तो बाग़ हैं।
न कोई ख़ाली फिरा तेरे आस्ताने से या ग़ौस,
ज़माने को मिली बख़्शिश तेरे ही बहाने से या ग़ौस।
करम की इक नज़र मुझ बेनवा पे भी हो जाए,
मेरी तारीक ज़िंदगी भी नूराने-नूर हो जाए।
देररात तक मुशायरे की महफ़िल जारी रही।इस मौके पर हाजी शावेज़ हाशमी,पम्मी ख़ाँ वारसी, सोहेल हाशमी,यावर अली खां बिट्टू,आसिम हुसैन क़ादरी,अहमद खान टीटू,नावेद हाशमी,फरमान खान,शहशांह मियाँ,बब्बू नियाज़ी,ताहिर खान,फ़ैज़ी खान,अक्लीम बेग अंजुम आदि सहित बड़ी तादात में अकीदतमंद शामिल रहे।


























































































