नई दिल्ली। डॉक्टरों और अस्पतालों के विज्ञापन तथा सोशल मीडिया प्रचार पर अंकुश लगाने के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने नई नैतिक गाइडलाइन जारी की है। आयोग के नैतिकता एवं चिकित्सा पंजीकरण बोर्ड की ओर से 6 अक्टूबर 2026 को जारी सार्वजनिक नोटिस के अनुसार, दिशा-निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे। इनका उद्देश्य चिकित्सा पेशे की गरिमा बनाए रखना, स्वास्थ्य सेवाओं के व्यावसायीकरण को रोकना और मरीजों को भ्रामक दावों से बचाना है। खास बात यह है कि नए नियमों का दायरा केवल अखबारों, टेलीविजन और पारंपरिक विज्ञापनों तक सीमित नहीं है, बल्कि वेबसाइट, सोशल मीडिया, व्हाट्सऐप, यूट्यूब, पॉडकास्ट, इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग, प्रायोजित पोस्ट और डिजिटल प्रचार के अन्य माध्यम भी इसमें शामिल हैं।
‘नंबर-1’ और गारंटीड इलाज के दावों पर रोक:
नई गाइडलाइन के तहत डॉक्टरों और चिकित्सा संस्थानों को स्वयं को ‘बेस्ट’, ‘टॉप’, ‘नंबर-1’ या ‘मोस्ट ट्रस्टेड’ बताकर मरीजों को आकर्षित करने वाले भ्रामक अथवा अप्रमाणित दावों से बचना होगा। इसी तरह ‘100 प्रतिशत सफलता’, ‘गारंटीड इलाज’, ‘चमत्कारी उपचार’ और बिना दर्द के इलाज जैसे दावों पर भी सख्ती की गई है, यदि वे प्रमाणित और सत्यापन योग्य न हों। चिकित्सा उपचार के परिणाम मरीज की स्थिति और बीमारी की गंभीरता सहित कई कारकों पर निर्भर करते हैं। इसलिए इलाज की सफलता की अवास्तविक गारंटी देकर मरीजों को प्रभावित करना चिकित्सा नैतिकता के विरुद्ध हो सकता है।
पेड रिव्यू और इन्फ्लुएंसर प्रचार पर भी शिकंजा:
नई व्यवस्था में डॉक्टरों और अस्पतालों के लिए फर्जी, भ्रामक या भुगतान करके तैयार कराए गए मरीजों के रिव्यू, रेटिंग, प्रशंसापत्र और अनुशंसाओं के जरिए अपनी सेवाओं का प्रचार करना प्रतिबंधित है। किसी सेलिब्रिटी, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, कर्मचारी, मरीज या तीसरे पक्ष का इस्तेमाल प्रतिबंधित प्रशंसापत्रों अथवा समर्थन के जरिए चिकित्सा सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए नहीं किया जा सकेगा। सर्च इंजन या डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डॉक्टरों की रैंकिंग में भुगतान अथवा हेरफेर के जरिए अनुचित बढ़त हासिल करने जैसी गतिविधियां भी नियमों के दायरे में हैं।
AI से तैयार सामग्री पर भी नजर:
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से बनाई गई तस्वीरों, वीडियो, मरीजों की काल्पनिक सफलता-कथाओं या इलाज के मनगढ़ंत परिणामों का इस्तेमाल करके भ्रामक प्रचार करने पर रोक लगाई गई है। AI से तैयार या संशोधित सामग्री के जरिए निदान, उपचार अथवा चिकित्सा परिणामों को लेकर गलत, भ्रामक या अप्रमाणित प्रस्तुति नहीं दी जा सकेगी। मरीजों की तस्वीरों, वीडियो और मेडिकल रिकॉर्ड का व्यावसायिक प्रचार में अनुचित इस्तेमाल भी प्रतिबंधित है। इसका उद्देश्य मरीजों की निजता की रक्षा करना और इलाज के वास्तविक परिणामों को लेकर जनता को गुमराह होने से बचाना है।
छूट, कूपन और रेफरल भुगतान पर भी प्रतिबंध:
चिकित्सा सेवाओं को व्यावसायिक उत्पाद की तरह बेचने के लिए मरीजों को आकर्षित करने वाली योजनाओं पर भी गाइडलाइन सख्त रुख अपनाती है। डिस्काउंट, कूपन, कैशबैक, उपहार, मुफ्त प्रक्रियाओं और मरीज भेजने के बदले भुगतान जैसी गतिविधियां नियमों के उल्लंघन का कारण बन सकती हैं। विज्ञापन एजेंसियों और इन्फ्लुएंसर को मरीजों के रेफरल से जोड़कर भुगतान करने की व्यवस्था भी नियमों के दायरे में है। चिकित्सा सेवा का प्रचार करते समय मरीज की जरूरत, उपचार की उपयुक्तता और पेशेवर नैतिकता को प्राथमिकता देनी होगी।
अस्पताल वेबसाइट पर दे सकेंगे जरूरी जानकारी:
नई गाइडलाइन का मतलब यह नहीं है कि डॉक्टर और अस्पताल इंटरनेट पर कोई जानकारी साझा नहीं कर सकेंगे। अस्पताल अपनी वेबसाइट पर विभागों, उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, सेवाओं के शुल्क तथा डॉक्टरों की शैक्षणिक योग्यता और विशेषज्ञता जैसी तथ्यात्मक जानकारी दे सकते हैं। डॉक्टरों की पेशेवर पहचान और योग्यता से जुड़ी आवश्यक जानकारी भी पारदर्शी ढंग से उपलब्ध कराई जा सकती है। इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों पर चिकित्सा संबंधी सामग्री साझा करते समय संबंधित चिकित्सक की पहचान, योग्यता और पंजीकरण संबंधी विवरण देना भी महत्वपूर्ण होगा।
स्वास्थ्य जागरूकता और वैज्ञानिक जानकारी की अनुमति:
NMC ने चिकित्सा संबंधी जनसंचार को तथ्यपरक, पारदर्शी, सत्यापन योग्य और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित रखने पर जोर दिया है। डॉक्टर रोगों की रोकथाम, स्वास्थ्य जागरूकता, उपचार संबंधी सामान्य जानकारी और जनस्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर शैक्षणिक सामग्री साझा कर सकते हैं। लेकिन ऐसी सामग्री को छिपे हुए विज्ञापन, मरीज जुटाने के अभियान या अप्रमाणित श्रेष्ठता के दावों का माध्यम नहीं बनाया जा सकेगा। सामान्य जनहित में बिना प्रचारात्मक उद्देश्य या व्यावसायिक लाभ के साझा की गई जानकारी के लिए गाइडलाइन में छूट का प्रावधान भी बताया गया है।
नियम तोड़ने पर हो सकती है कार्रवाई:
दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वाले पंजीकृत चिकित्सकों के खिलाफ लागू नियमों के अनुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। मामले की प्रकृति के आधार पर पंजीकरण निलंबन या अन्य दंडात्मक कार्रवाई की स्थिति बन सकती है। हालांकि, किसी विशिष्ट उल्लंघन पर कार्रवाई का स्वरूप संबंधित प्रावधानों और सक्षम प्राधिकरण के निर्णय पर निर्भर करेगा। NMC ने यह गाइडलाइन सुप्रीम कोर्ट में दायर सिविल रिट याचिका संख्या 1160/2023 और भारतीय चिकित्सा परिषद के व्यावसायिक आचरण, शिष्टाचार एवं नैतिकता विनियम, 2002 के प्रावधानों को ध्यान में रखकर तैयार की है। नई व्यवस्था से डॉक्टरों और अस्पतालों के ऑनलाइन प्रचार में पारदर्शिता बढ़ने तथा मरीजों के हितों की बेहतर सुरक्षा की उम्मीद है।


























































































